
नेशनल डेस्क : सोने की कीमतों में गिरावट का दौर लगातार जारी है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में पीली धातु पर दबाव बना हुआ है, जिसके चलते कीमतों में बड़ी नरमी देखने को मिल रही है। बाजार रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोने में आई यह गिरावट पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में शामिल मानी जा रही है। अक्टूबर 2008 के बाद पहली बार सोने के भाव में इतनी तेज कमजोरी दर्ज की गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिसला सोना
1 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय कॉमेक्स बाजार में सोने की कीमतों में फिर गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना 22 डॉलर से अधिक टूटकर करीब 3,985 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। दिन की शुरुआत में इसका भाव 4,005.69 डॉलर प्रति औंस था, लेकिन लगातार बिकवाली के दबाव के कारण कीमत 4,000 डॉलर के अहम स्तर से नीचे आ गई।
एमसीएक्स में भी भारी दबाव
घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स में भी सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत में 10 ग्राम सोने का भाव 1.92 लाख रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि जून महीने में इसमें लगातार कमजोरी बनी रही और कीमतों में करीब 19,700 रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
महीने की शुरुआत में जहां 10 ग्राम सोना करीब 1.60 लाख रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था, वहीं 30 जून तक इसका भाव घटकर लगभग 1.40 लाख रुपये रह गया।
रिकॉर्ड स्तर से 20 फीसदी तक टूटा सोना
बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोना अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से अब तक करीब 20 फीसदी तक नीचे आ चुका है। वहीं चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से करीब 43 फीसदी तक फिसल चुकी हैं, जिससे निवेशकों का ध्यान इस ओर भी गया है।
क्या हैं गिरावट की बड़ी वजहें?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में नरमी के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर महंगाई के अनुमान पर पड़ा है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंकाएं बढ़ी हैं।
बाजार में यह भी चर्चा है कि नए नेतृत्व के तहत अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतियां पहले से अधिक सख्त हो सकती हैं। इससे निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल रहा है।
डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी डॉलर में मजबूती भी सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाला प्रमुख कारण है। डॉलर मजबूत होने पर आमतौर पर सोने में निवेश की मांग कमजोर पड़ती है।
इसके अलावा वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती और शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच कई निवेशक अपनी पूंजी अन्य परिसंपत्तियों में स्थानांतरित कर रहे हैं। इसका असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
Navyug Samachar