बिजनेस डेस्क: कारोबार में सफलता सिर्फ बड़ी पूंजी से नहीं, बल्कि सही सोच, मेहनत और दूरदृष्टि से मिलती है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं आरजी चंद्रमोगन, जिन्होंने महज 13,000 रुपये की शुरुआती पूंजी से कारोबार शुरू किया और आज करीब 20,000 करोड़ रुपये मूल्य वाली कंपनी खड़ी कर दी। उनकी सफलता की कहानी आज लाखों युवाओं और उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
कॉलेज की पढ़ाई अधूरी, 65 रुपये महीने की नौकरी से की शुरुआत
आरजी चंद्रमोगन के लिए कॉलेज की डिग्री सफलता की शर्त नहीं बनी। गणित विषय में असफल होने के बाद उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और 65 रुपये प्रतिमाह की मजदूरी पर काम करना शुरू किया। बाद में उन्होंने चेन्नई में एक छोटी सी दुकान से आइसक्रीम बेचने का कारोबार शुरू किया। आज पांच दशक बाद वही सफर उन्हें देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों में से एक के शीर्ष तक ले आया है। उनकी कंपनी हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स का मूल्य लगभग 20,000 करोड़ रुपये बताया जाता है।
परिवार का कारोबार ठप हुआ, फिर बदली जिंदगी
आरजी चंद्रमोगन का जन्म तमिलनाडु के एक साधारण कारोबारी परिवार में हुआ था। उनके पिता वर्ष 1956 में चेन्नई आए और रेलवे स्टेशन के पास किराने की दुकान शुरू की। हालांकि वर्ष 1968 में कारोबार बंद हो गया और परिवार को वापस अपने गांव लौटना पड़ा। आर्थिक संकट का असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ा।
नौकरी के दौरान मिला कारोबार करने का आत्मविश्वास
कॉलेज छोड़ने के बाद उनके पिता ने उन्हें चेन्नई से करीब 160 किलोमीटर दूर विलुप्पुरम स्थित एक लकड़ी के गोदाम में काम दिलाया। यहां उन्हें हर महीने 65 रुपये वेतन मिलता था। करीब एक साल तक ऑर्डर लेने और मेहनत वाले काम करने के दौरान उन्होंने कारोबार की बारीकियां सीखीं और खुद का व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास हासिल किया।
पुश्तैनी जमीन बेचकर मिले 13 हजार रुपये
खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला करने के बाद आरजी चंद्रमोगन चेन्नई लौट आए। उनके पिता ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए परिवार की पुश्तैनी जमीन बेच दी और उससे मिले 13,000 रुपये उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए दिए।
वर्ष 1970 में उन्होंने चेन्नई के रॉयपुरम इलाके में 250 वर्ग फुट की एक छोटी जगह किराये पर ली, बर्फ बनाने की मशीन खरीदी और चार कर्मचारियों के साथ ‘अरुण’ ब्रांड के नाम से आइसक्रीम बनाना शुरू किया। शुरुआती दिनों में वह खुद ठेला लगाकर शहर की गलियों में आइसक्रीम बेचते थे।
आइसक्रीम से डेयरी कारोबार की ओर बढ़ाया कदम
करीब एक दशक तक आइसक्रीम कारोबार करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि डेयरी उद्योग में अधिक संभावनाएं हैं। इसके बाद 1980 के दशक में उन्होंने दूध प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। धीरे-धीरे कंपनी ने दूध के साथ मक्खन, घी और दही जैसे उत्पाद भी बाजार में उतारे और ‘अरुण’ ब्रांड एक बड़े डेयरी कारोबार में बदल गया।
आरजी चंद्रमोगन ने तेज विस्तार की बजाय वितरण नेटवर्क मजबूत करने, किसानों से मजबूत संबंध बनाने और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया। यही रणनीति उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
आज 20 हजार करोड़ रुपये की कंपनी के मालिक
दीर्घकालिक रणनीति और लगातार विस्तार के दम पर हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स देश की सबसे बड़ी निजी डेयरी कंपनियों में शामिल हो गई। जुलाई 2020 तक कंपनी का बाजार पूंजीकरण 20,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका था।
फोर्ब्स के अनुसार, आरजी चंद्रमोगन की कुल संपत्ति 1.6 अरब डॉलर है। वर्ष 2023 में वह भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में 99वें स्थान पर रहे, जबकि 2026 की वैश्विक अरबपतियों की सूची में उन्हें 2,481वां स्थान मिला। डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2018 में उन्हें भारतीय डेयरी एसोसिएशन के संरक्षण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
Navyug Samachar
