Friday , 30 October 2026

अनंत सिंह की जमानत रद्द, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश; 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर, दुलारचंद यादव हत्याकांड में बढ़ीं मुश्किलें

बिहार डेस्क: बिहार के चर्चित नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है। साथ ही अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद अनंत सिंह की जेल वापसी का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अनंत सिंह अदालत के निर्देश का पालन करते हुए कब तक सरेंडर करते हैं। जमानत रद्द होने से इस मामले में उनकी कानूनी चुनौतियां और गंभीर हो गई हैं।

दुलारचंद यादव हत्याकांड में आरोपी हैं अनंत सिंह

मोकामा के विधायक अनंत सिंह दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में आरोपी हैं। इस मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है। घटना के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्हें जेल से रिहाई मिल गई थी।

हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने अनंत सिंह को मिली राहत समाप्त करने की मांग की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने का फैसला सुनाया और 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया।

नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाई कोर्ट के जमानत संबंधी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि अनंत सिंह को जमानत देते समय उनके आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

इस मामले में 30 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी। अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड का पूरा मामला?

दुलारचंद यादव की मौत का यह मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। वह जन सुराज पार्टी के समर्थक और पूर्व आरजेडी नेता थे।

इस घटना के बाद अनंत सिंह का नाम हत्याकांड में सामने आया था। पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।

बाद में 19 मार्च 2026 को पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने उनकी कानूनी स्थिति बदल दी है और उन्हें दोबारा आत्मसमर्पण करना होगा।

जेडीयू से छह साल का निष्कासन, अब जेल वापसी की नौबत

अनंत सिंह के सामने राजनीतिक मोर्चे पर भी मुश्किलें कम नहीं हैं। जनता दल यूनाइटेड ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ भी पार्टी ने कार्रवाई की है।

अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। ऐसे में बिहार की राजनीति में इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि अनंत सिंह कब आत्मसमर्पण करते हैं और इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।

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