नेशनल डेस्क: भगवान शिव की पूजा में रुद्राक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव को प्रिय है और इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा तथा मानसिक शांति मिलती है। यही वजह है कि शिवभक्त रुद्राक्ष की माला और दाने को श्रद्धापूर्वक धारण करते हैं। लेकिन बाजार में इसकी बढ़ती मांग के साथ नकली रुद्राक्ष की बिक्री का खतरा भी बना रहता है। कई बार प्लास्टिक, लकड़ी और दूसरे बीजों से तैयार दानों को असली बताकर बेच दिया जाता है। ऐसे में रुद्राक्ष खरीदने से पहले उसकी पहचान के कुछ जरूरी तरीके जानना बेहद जरूरी है।1. रुद्राक्ष की प्राकृतिक धारियों को ध्यान से देखें
असली रुद्राक्ष की पहचान के लिए सबसे पहले उसकी प्राकृतिक बनावट पर ध्यान देना चाहिए। इसके दाने पर ऊपर से नीचे तक प्राकृतिक धारियां बनी होती हैं, जिन्हें मुख कहा जाता है। प्रत्येक रुद्राक्ष में मुखों की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
असली दाने में ये धारियां प्राकृतिक रूप से बनी होती हैं और एक सिरे से दूसरे सिरे तक दिखाई देती हैं। वहीं, नकली रुद्राक्ष में कई बार मशीन या अन्य तरीकों से कृत्रिम लकीरें बनाई जाती हैं। इसलिए खरीदारी के समय दाने को अच्छी तरह देखकर उसकी बनावट समझें। हालांकि, केवल धारियों के आधार पर असली होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
2. पानी में डालकर जांचने का तरीका
रुद्राक्ष की पहचान के लिए पानी वाला परीक्षण भी काफी प्रचलित है। इस तरीके में दाने को पानी से भरे बर्तन में डालकर देखा जाता है। आम मान्यता है कि असली रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है, जबकि नकली दाना ऊपर तैरता रहता है।
हालांकि, यह तरीका पूरी तरह विश्वसनीय नहीं है। रुद्राक्ष की नमी, उसके अंदर मौजूद हवा और प्राकृतिक संरचना के कारण पानी में उसका व्यवहार अलग-अलग हो सकता है। कुछ असली रुद्राक्ष पानी में तैर सकते हैं, जबकि नकली दाने भी डूब सकते हैं। इसलिए सिर्फ इस परीक्षण के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए।
3. तांबे के सिक्कों वाला परीक्षण कितना सही?
रुद्राक्ष की शुद्धता जांचने के लिए तांबे के सिक्कों वाला तरीका भी बताया जाता है। इसमें दाने को तांबे के दो सिक्कों के बीच रखकर उसकी हलचल या कंपन महसूस करने की कोशिश की जाती है। कुछ लोगों का दावा है कि इससे असली और नकली रुद्राक्ष के बीच अंतर पता लगाया जा सकता है।
हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सिक्कों के बीच रुद्राक्ष में हलचल होना या नहीं होना उसकी वास्तविकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसलिए इस घरेलू तरीके पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए।
4. रंग और चमक देखकर भी करें पहचान
रुद्राक्ष खरीदते समय उसके रंग और बाहरी सतह को भी ध्यान से देखना चाहिए। कई बार दाने को आकर्षक बनाने के लिए उस पर कृत्रिम रंग या पॉलिश चढ़ाई जाती है। यदि उसकी सतह पर असामान्य चमक या रंग में असमानता दिखाई दे तो विक्रेता से इसकी गुणवत्ता और प्रसंस्करण के बारे में जानकारी लें।
कुछ लोग सरसों के तेल में रुद्राक्ष भिगोकर रंग की जांच करने की सलाह देते हैं, लेकिन यह भी प्रमाणित परीक्षण नहीं है। बिना जानकारी के ऐसा प्रयोग करने से दाने की प्राकृतिक सतह प्रभावित हो सकती है।
रुद्राक्ष खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान
असली रुद्राक्ष खरीदने के लिए सबसे जरूरी है कि हमेशा विश्वसनीय विक्रेता का चुनाव करें। दाने की उत्पत्ति, गुणवत्ता और प्राकृतिक संरचना के बारे में जानकारी जरूर लें। यदि आप महंगा या दुर्लभ मुखी रुद्राक्ष खरीद रहे हैं तो किसी अनुभवी विशेषज्ञ या विश्वसनीय परीक्षण प्रयोगशाला से उसकी जांच कराने पर विचार करें।
जरूरत पड़ने पर सूक्ष्मदर्शी की मदद से रुद्राक्ष की प्राकृतिक संरचना और धारियों का परीक्षण भी किया जा सकता है। धार्मिक आस्था से जुड़ी इस वस्तु को खरीदते समय केवल कम कीमत या आकर्षक दावों के आधार पर फैसला न करें। पानी, तांबे के सिक्के और तेल से जुड़े घरेलू परीक्षण असली रुद्राक्ष होने की गारंटी नहीं देते।
Navyug Samachar