लखनऊ: उत्तर प्रदेश में युवाओं को अपने कारोबार की शुरुआत करने और नए विचारों को व्यावसायिक रूप देने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने स्टार्टअप नीति-2026 लागू की है। इस नीति के तहत नवाचार, तकनीक और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसा मजबूत तंत्र तैयार करना है, जिससे युवा वित्तीय सहायता, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, तकनीकी सुविधाओं और बाजार तक पहुंचने के अवसरों का लाभ उठा सकें। नीति में बुनियादी ढांचे, वित्तीय सहायता, कौशल विकास, उद्योगों से जुड़ाव, प्रचार-प्रसार और संस्थागत सहयोग को छह प्रमुख आधार बनाया गया है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक जैसी उभरती तकनीकों को भी प्राथमिकता दी गई है।
छह प्रमुख आधारों पर आगे बढ़ेगा यूपी का स्टार्टअप इकोसिस्टम
यूपी स्टार्टअप मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमित महाजन के अनुसार, सरकार युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार देने वाले उद्यमियों के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। स्टार्टअप नीति-2026 के जरिए विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों को अपने विचारों पर काम करने के लिए आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
इस व्यवस्था के माध्यम से नए उद्यमों को बाजार से जोड़ने और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के मुताबिक कारोबार विकसित करने पर जोर रहेगा। नीति के छह प्रमुख आधारों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, वित्तीय सहायता, प्रतिभा विकास एवं क्षमता निर्माण, उद्योगों से जुड़ाव, स्टार्टअप इकोसिस्टम का प्रचार-प्रसार और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना शामिल है।
बुनियादी सुविधाओं से लेकर पूंजी जुटाने तक मिलेगी मदद
स्टार्टअप नीति के पहले आधार के तहत उद्यमियों के लिए भौतिक और डिजिटल बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। दूसरे आधार में सरकारी योजनाओं और निजी निवेशकों के माध्यम से वित्तीय सहायता तथा पूंजी जुटाने के अवसर बढ़ाने की योजना है।
तीसरे आधार के तहत शिक्षा, कौशल विकास और प्रशिक्षण के जरिए नवाचार से जुड़ा कार्यबल तैयार करने पर जोर रहेगा। चौथे आधार में स्टार्टअप, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा, ताकि नए उद्यम अपने उत्पादों और सेवाओं को बाजार तक पहुंचा सकें।
पांचवें आधार के तहत उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप क्षेत्र की संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने तथा नई साझेदारियां विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। छठे आधार में संस्थागत क्षमता बढ़ाने, विभिन्न पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने और सहयोग की व्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
StartinUP पोर्टल पर एक मंच से मिलेंगी स्टार्टअप से जुड़ी सुविधाएं
नई नीति के तहत StartinUP ऑनलाइन पोर्टल को एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके जरिए स्टार्टअप, निवेशक, इन्क्यूबेटर, मार्गदर्शक, उत्कृष्टता केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों को एक साथ जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाना और स्टार्टअप से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाना है।
पोर्टल पर स्टार्टअप नीतियों, प्रोत्साहनों, संसाधनों, इन्क्यूबेशन केंद्रों, आगामी कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। उद्यमियों को क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों का लाभ भी मिल सकेगा।
इन कार्यक्रमों में उद्यमिता विकास, स्टार्टअप प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, नियामकीय नियमों का पालन, बौद्धिक संपदा अधिकार, तकनीक का व्यावसायिक उपयोग और बाजार तक पहुंच जैसे विषय शामिल होंगे। इसके लिए विषय विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थानों को पोर्टल से जोड़ने की योजना है।
ऑनलाइन पंजीकरण और प्रोत्साहन राशि के लिए भी कर सकेंगे आवेदन
StartinUP पोर्टल पर स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर और उत्कृष्टता केंद्र ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। इसके माध्यम से प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन करने और संबंधित दावे नोडल एजेंसी के सामने जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इन आवेदनों का मूल्यांकन और मंजूरी नोडल एजेंसी की प्रक्रिया के तहत होगी।
पोर्टल पर प्रबंधन सूचना प्रणाली यानी एमआईएस की सुविधा भी रहेगी। इसके जरिए स्टार्टअप से जुड़ी गतिविधियों और नीति के क्रियान्वयन की निगरानी की जा सकेगी।
इसके अलावा पोर्टल को केंद्र सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और स्टार्टअप इंडिया के भास्कर तथा मार्ग जैसे मंचों से जोड़ने की व्यवस्था है। भविष्य में नई सुविधाएं शामिल करने और अन्य पोर्टलों के साथ इसका तालमेल बढ़ाने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
स्टार्टअप की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन की योजना
नई व्यवस्था में स्टार्टअप से जुड़ी शिकायतों और सवालों के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन तथा सोशल मीडिया के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की भी योजना है। इससे उद्यमियों को अपनी समस्याएं साझा करने और जरूरी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकेगी।
डिजिटल मंच के जरिए स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर, एक्सेलेरेटर, मार्गदर्शक, निवेशक और उत्कृष्टता केंद्र आपस में संपर्क कर सकेंगे। इससे उनके बीच नेटवर्किंग, साझेदारी और सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
स्टार्टअप नीति-2026 और StartinUP पोर्टल के माध्यम से सरकार का जोर युवाओं को कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए जरूरी संसाधन, मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता तथा बाजार तक पहुंचने के अवसर एक ही व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने पर है।
Navyug Samachar
