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भगवान की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिल सकता है विपरीत फल

धर्म डेस्क : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के दौरान नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। कहा जाता है कि पूजा में की गई कुछ गलतियां शुभ फल मिलने में बाधा बन सकती हैं और व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में पूजा करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है।

पूजा की शुरुआत सबसे पहले गणेश जी से करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पूजा या शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जाती है। उन्हें प्रथम पूज्य देवता माना गया है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा के बाद ही अन्य देवी-देवताओं की आराधना करनी चाहिए। साथ ही गणेश जी को तुलसी दल अर्पित करने की मनाही बताई गई है। ऐसा करना दोषकारी माना जाता है।

महादेव को केतकी का फूल न चढ़ाएं

भगवान शिव की पूजा में कई प्रकार के पुष्प अर्पित किए जाते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केतकी का फूल महादेव को नहीं चढ़ाना चाहिए। पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि भगवान शिव ने केतकी को श्राप दिया था, जिसके कारण यह फूल उनकी पूजा में वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं।

भगवान को स्नान कराते समय रखें विशेष सावधानी

पूजा से पहले देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्नान कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिमा को स्नान कराते समय केवल उंगलियों का उपयोग करना चाहिए। अंगूठे का प्रयोग करना उचित नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इस नियम की अनदेखी करने से कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

रविवार को तुलसी पूजा से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान

शास्त्रों में रविवार के दिन तुलसी पूजा को वर्जित बताया गया है। इसके अलावा सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधे को स्पर्श करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु अप्रसन्न हो सकते हैं और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

शालिग्राम पर अक्षत चढ़ाने से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शालिग्राम जी पर अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित नहीं किए जाते। इसे शास्त्रों में अनुचित माना गया है। मान्यता है कि शालिग्राम पूजा में इस नियम का विशेष ध्यान रखना चाहिए, अन्यथा पूजा का शुभ प्रभाव प्रभावित हो सकता है।

 

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