
धर्म डेस्क: शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घरों में घट स्थापना या कलश स्थापना करते हैं और पूजा स्थल की शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं. मान्यता है कि घट स्थापना के जरिए घर में माता रानी का आह्वान किया जाता है और कुछ दिनों के लिए कलश के माध्यम से मां को घर में स्थापित किया जाता है.
घट स्थापना के लिए जिस तरह कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, उसी तरह कलश स्थापना के बाद भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों कुछ गलतियों से बचना चाहिए ताकि माता दुर्गा की कृपा बनी रहे.
घट स्थापना के बाद घर को अकेला न छोड़ें
घट स्थापना के बाद घर में स्थापित कलश और अखंड ज्योत की देखभाल जरूरी मानी जाती है. अगर घर में अखंड ज्योत जलाई गई है, तो उसे गलती से भी बुझने नहीं देना चाहिए. साथ ही अखंड ज्योत को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए.
मान्यता के अनुसार, कलश के साथ माता को घर में स्थापित किया जाता है. ऐसे में नवरात्र के दौरान घर को पूरी तरह अकेला छोड़ने और उसमें ताला लगाने से बचना चाहिए. पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए और कलश का सम्मान करना चाहिए.
नवरात्र में तामसिक भोजन से करें परहेज
नवरात्र के दौरान सात्विक भोजन का विशेष महत्व बताया गया है. अगर कोई व्यक्ति उपवास नहीं भी करता है, तब भी इन नौ दिनों में तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है.
इस दौरान मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज को भोजन में शामिल नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घट स्थापना के बाद घर में तामसिक भोजन करने से माता का अपमान माना जाता है और पूजा का फल नहीं मिलता. इन दिनों सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और भक्ति में मन लगाने में मदद मिलती है.
घर में लड़ाई-झगड़े और कलह से बचें
शारदीय नवरात्र को माता दुर्गा की उपासना और आत्मिक शुद्धि का समय माना जाता है. ऐसे में इन दिनों घर में बेवजह क्रोध करने और कटु शब्दों का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है.
परिवार के सदस्यों को आपसी प्रेम और शांति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. किसी भी तरह के लड़ाई-झगड़े और कलह-कलेश से बचना चाहिए. इससे पूजा के दौरान मन शांत रहेगा और भक्ति में ध्यान लगाने में आसानी होगी.
अगर आप भी शारदीय नवरात्र के दौरान घर में घट स्थापना करते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन गलतियों से बचने से पूजा-पाठ का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है.
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