
प्रशांत महासागर: समुद्र की गहराई में आज भी ऐसी दुनिया मौजूद है, जिसके बारे में विज्ञान को बहुत कम जानकारी है। इसका बड़ा उदाहरण करीब 3 साल पहले हुई एक खोज है। प्रशांत महासागर में वैज्ञानिकों को 11,742 वायरस मिले, जिनमें से लगभग 99 फीसदी के बारे में वैज्ञानिक पहले से कुछ नहीं जानते थे। यह खोज बताती है कि समुद्र के नीचे का जीवन अब भी कई रहस्यों से भरा हुआ है।
2023-2024 के दौरान की गई इस रिसर्च में ऐसे वायरस सामने आए, जिनका पहले कोई पता नहीं था। वैज्ञानिकों ने इनके नमूने इकट्ठा किए और उनके डीएनए और आरएनए का अध्ययन किया। इसके बाद इनकी तुलना समुद्र की गहराई से लिए गए दूसरे नमूनों से की गई।
क्लेरियन-क्लिपरटन जोन में हुई खोज
यह खोज प्रशांत महासागर के क्लेरियन-क्लिपरटन जोन में हुई। इस इलाके में पॉलीमेटेलिक नॉड्यूलस का दुनिया में सबसे बड़ा भंडार पाया जाता है और कुछ देश यहां बड़े स्तर पर खोज में जुटे हुए हैं। चोंगकिंग विश्वविद्यालय के बोवेन होउ और लिलान झांग के साथ चीन के द्वितीय समुद्र विज्ञान संस्थान के डोंग सुंग भी इस खोज में शामिल थे।
11,742 वायरस मिले, लगभग सभी विज्ञान के लिए नए
वैज्ञानिकों ने कुल 11,742 वायरस की पहचान की। इनमें से लगभग सभी विज्ञान के लिए अपरिचित थे। 2023 से 2024 के बीच समुद्र की गहराई से सैंपल जुटाए गए थे। इनसे डीएनए और आरएनए निकाला गया और फिर दूसरे समुद्री नमूनों से तुलना की गई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ये वायरस समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का जरूरी हिस्सा हैं। हालांकि अभी यह जांच का विषय है कि इन्हें जिंदा माना जाए या नहीं। इसके बावजूद समुद्री जीवन को प्रभावित करने वाली इनकी विशेषताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कैसे तय होता है कि वायरस नया है?
किसी वायरस को नया तभी माना जा सकता है, जब उसका अनुक्रम पहले से मौजूद डाटाबेस में उपलब्ध किसी अनुक्रम से मेल न खाए। हालांकि एक संभावना यह भी है कि समुद्र की गहराई में पाए जाने वाले वायरस से जुड़ा डाटाबेस अभी काफी छोटा है। ऐसे में किसी वायरस का पहले से मौजूद रिकॉर्ड होने के बावजूद उससे मिलान नहीं हो पाया हो सकता है।
नए वायरस की जानकारी से क्या फायदा होगा?
इन वायरस की जानकारी मिलने से समुद्र की गहराई में मौजूद पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही समुद्र में होने वाली माइनिंग का जलीय जीवन पर क्या असर पड़ता है, यह जानने में भी मदद मिलेगी।
भविष्य में वैज्ञानिक यह भी देख सकेंगे कि अगली माइनिंग के दौरान इन वायरस की संख्या बढ़ती है या घटती है और इसका समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है। इससे समुद्र की गहराई में होने वाले बदलावों को समझने में नई जानकारी मिल सकती है।
Navyug Samachar