
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के 4.60 लाख छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में एक क्लिक से 148 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति की राशि ट्रांसफर की। लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने छात्रों से अपील की कि जब भी उन्हें पैसे मिलें, तो सबसे पहला निवेश अपनी पढ़ाई पर करें। उन्होंने अच्छी किताबें खरीदने और अपना बुक बैंक बनाने की भी सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले छात्रों को छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलती थी और कई बार पूरी राशि भी नहीं मिलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण छात्रों तक पहुंचने वाली छात्रवृत्ति की रकम में भी कटौती होती थी।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पहले प्रदेश में छात्रवृत्ति के लिए करीब 2900 करोड़ रुपये की धनराशि दी जाती थी, जबकि अब 6200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
प्रवेश के बाद ही छात्रवृत्ति भेजने की व्यवस्था
सीएम योगी ने कहा कि अब छात्रों को प्रवेश लेने के बाद ही छात्रवृत्ति भेजने की व्यवस्था की गई है। 2 अक्टूबर को बैंक बंद होने के कारण इस बार 3 अक्टूबर को छात्रवृत्ति की राशि खातों में भेजी गई।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि कोई भी बच्चा छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल संस्था की गलती, छात्र की ओर से देर से आवेदन या किसी अन्य त्रुटि के कारण जिन छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई थी, उन्हें भी छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है।
पैसों के अभाव में नहीं रुकेगी किसी छात्र की पढ़ाई
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार चाहती है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी छात्र की पढ़ाई बाधित न हो। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति हर छात्र का संबल बनेगी और सरकार सभी वर्गों के विद्यार्थियों को इसका लाभ दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी ऐसे समय में उत्तर प्रदेश में शिक्षा हासिल कर रही है, जब उसके सामने पहचान का संकट नहीं है। उन्होंने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय यूपी के युवाओं को प्रदेश से बाहर जाने पर अलग नजर से देखा जाता था।
स्कूलों में सुविधाओं से लेकर पढ़ाई तक पर सरकार का दावा
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में दंगे और कर्फ्यू की स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अध्ययन कराया तो सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चियां स्कूल छोड़ रही थीं, क्योंकि स्कूलों में पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पीने के पानी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा के 1.60 करोड़ बच्चों के लिए कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि की व्यवस्था भी सरकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि अटल विद्यालयों में अनाथ बच्चों के पालन-पोषण के साथ उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, कस्तूरबा विद्यालयों में इंटर तक की पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है।
पिछले वित्त वर्ष में 65.95 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली मदद
सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को 4793 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के जरिए भेजी गई।
किस वर्ग के कितने छात्रों को मिली छात्रवृत्ति
इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 छात्र-छात्राओं को 60.01 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। अनुसूचित वर्ग के 1,59,959 छात्रों को 64.54 करोड़ रुपये और सामान्य वर्ग के 38,084 छात्रों को 11.43 करोड़ रुपये की राशि मिली।
Navyug Samachar