Wednesday , 23 September 2026

17 साल के छात्र ने गणित की गुत्थी सुलझाकर जीते 2.39 करोड़ रुपये, कंप्यूटर प्रोग्राम से खोज निकाला हैरान करने वाला जवाब

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में रहने वाले 17 वर्षीय छात्र कॉनर हिल ने पढ़ाई के साथ गणित के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने ज्यामिति से जुड़ी एक जटिल समस्या पर शोध करते हुए कंप्यूटर प्रोग्राम की मदद से उसका समाधान खोज निकाला। इस काम के लिए उन्हें 2026 रीजेनरॉन साइंस टैलेंट सर्च में पहला स्थान मिला और पुरस्कार के तौर पर 2.5 लाख डॉलर यानी करीब 2.39 करोड़ रुपये की राशि दी गई।

कॉनर हिल पोर्ट मटिल्डा के रहने वाले हैं और स्टेट कॉलेज स्थित डेल्टा हाई स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने गणित की दुर्लभ त्रि-आयामी आकृतियों पर अपना शोध किया, जिन्हें नोबल पॉलीहेड्रा कहा जाता है। इन आकृतियों की खासियत यह है कि इनके सभी फलक एक जैसे आकार के होते हैं और हर शीर्ष पर बनने वाला कोण भी समान होता है। घन यानी क्यूब इसका सबसे आसान उदाहरण है।

गणितज्ञों के सामने क्या थी चुनौती?

नोबल पॉलीहेड्रा को लेकर गणितज्ञ पहले ही दो अनंत परिवार और 61 अलग-अलग उदाहरण खोज चुके थे। हालांकि, यह सवाल अब भी बना हुआ था कि क्या इनके अलावा भी कुछ और अलग-अलग आकृतियां मौजूद हो सकती हैं।

कॉनर ने इसी सवाल पर काम शुरू किया। उन्होंने एक कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किया, जिसकी मदद से इन आकृतियों के बनने की सभी संभावित स्थितियों की जांच की गई। उनके शोध से सामने आया कि अलग-अलग यानी आइसोलेटेड नोबल पॉलीहेड्रा की कुल संख्या 146 है। इसके अलावा पहले से ज्ञात दो अनंत परिवार भी मौजूद हैं।

ऑनलाइन ज्यामिति समुदाय से मिला था आइडिया

कॉनर को इस समस्या के बारे में एक ऑनलाइन ज्यामिति समुदाय के जरिए जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे इस समस्या पर काम किया और अपने निष्कर्ष को पूर्ण गणितीय प्रमाण में बदल दिया।

उनके शोध में डिस्क्रीट ज्योमेट्री और अल्जेब्रिक ज्योमेट्री से जुड़े विचारों का इस्तेमाल किया गया। कॉनर के मुताबिक, उन्हें हमेशा पैटर्न और अलग-अलग क्षेत्रों में उनके दिखाई देने के तरीके आकर्षित करते रहे हैं।

2600 से ज्यादा आवेदन, सिर्फ 40 फाइनलिस्ट

कॉनर की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 2026 रीजेनरॉन साइंस टैलेंट सर्च में 2600 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से सिर्फ 40 छात्रों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। कॉनर ने सभी फाइनलिस्ट को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया।

इस उपलब्धि के साथ उन्हें 2.5 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि मिली, जो भारतीय मुद्रा में करीब 2.39 करोड़ रुपये है। हाई स्कूल की पढ़ाई के दौरान हासिल की गई यह सफलता उन्हें कम उम्र में ही गणित और शोध के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाती है।

अब MIT में पढ़ाई करेंगे कॉनर

कॉनर अब मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिला लेने वाले हैं। हालांकि, गणित और शोध के अलावा भी उनकी कई रुचियां हैं। वह अपने स्कूल के समाचार कार्यक्रम में एक खंड चलाते हैं और शावर्स क्रीक एनवायरनमेंटल सेंटर में स्वयंसेवक के तौर पर भी काम करते हैं। इसके अलावा उन्हें प्रकृति के बीच जगलिंग करना भी पसंद है।

 

Check Also

गाड़ी में दोस्त को बंद कर शेरों के बीच उतर गया गाइड, जानवरों ने भी कराया ‘हेलो’, वीडियो देख दंग रह गए लोग

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: दक्षिण अफ्रीका के एक लायन सफारी पार्क का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी …