Tuesday , 6 October 2026

3 मैच, बदला पूरा माहौल! वीवीएस लक्ष्मण की शांत कोचिंग ने टीम इंडिया में फूंका नया जोश

नेशनल डेस्क: जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं, बल्कि अपने बदले हुए खेल और सकारात्मक माहौल से भी सभी का ध्यान खींचा है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे, जिन्होंने बिना किसी विवाद या बयानबाजी के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी कार्यशैली और शांत नेतृत्व ने यह दिखाया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती, बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी जीत में अहम भूमिका निभाता है।

हार और आलोचनाओं के दौर में संभाली जिम्मेदारी

इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। इसी बीच जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे, तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद कायम किया और किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

मैदान पर दिखा भरोसे का असर

लक्ष्मण की कार्यशैली का असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर उनके मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना, जिससे खिलाड़ी बिना अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल खेल सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट रूप से नजर आई।

चयन नीति ने भी जीता खिलाड़ियों का भरोसा

वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा में रही। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए, लेकिन केवल प्रयोग करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया, जबकि सीरीज जीतने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि टीम में अवसर प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर मिलेंगे।

युवा खिलाड़ियों के विकास का अनुभव आया काम

युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम मुख्य कोच के रूप में भी उनके काम आया।

फील्डिंग अब भी बनी हुई है चुनौती

हालांकि केवल तीन मैचों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े, जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया, लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

स्थायी कोच नहीं बने, फिर भी बढ़ी चर्चा

वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। जिम्बाब्वे दौरे के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग-अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

भरोसे और संतुलन ने बदली टीम की तस्वीर

जिम्बाब्वे दौरे ने यह संकेत दिया कि टीम की सफलता केवल रणनीति और तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों के जरिए यही संदेश भारतीय क्रिकेट को दिया है।

 

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