
नेशनल डेस्क: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, लेकिन असली मुकाबला अब क्रॉस वोटिंग और भीतरघात की आशंका को लेकर सिमटता दिख रहा है। कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जिससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है।
कांग्रेस द्वारा पूर्व लोकसभा सांसद और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असहमति के स्वर तेज हो गए हैं। इसी असंतोष के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों की आपात बैठक भी बुलाई है।
तीन सीटों पर सियासी गणित हुआ दिलचस्प
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होती है। मौजूदा समीकरणों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से सुरक्षित कर सकती है। इसके बाद भी उसके पास अतिरिक्त वोट बचते हैं, जिससे तीसरे उम्मीदवार की संभावना भी मजबूत हो जाती है।
कांग्रेस के पास इस समय संख्या बल के हिसाब से पर्याप्त विधायक हैं, लेकिन कुछ विधायकों की अयोग्यता और मतदान से रोक जैसे मामलों के चलते उसकी स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में एक सीट जीतने के बावजूद क्रॉस वोटिंग का खतरा पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
मीनाक्षी नटराजन के नाम पर क्यों बढ़ा विरोध?
कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी देखी जा रही है। कई नेताओं का कहना है कि 2014 के बाद से उनका स्थानीय विधायकों और संगठन से संपर्क कमजोर पड़ा है। इसी कारण उनके नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।
भोपाल के एक कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दोबारा मौका दिया जाता, तो सीट जीतने की संभावना अधिक मजबूत रहती। इस बयान के बाद पार्टी में अंदरूनी बहस और तेज हो गई है।
बीजेपी की नजर क्रॉस वोटिंग पर
भारतीय जनता पार्टी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि तीसरा उम्मीदवार उतारा गया तो जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार है। वहीं, बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान को लेकर तंज भी कसा है।
पुराने घटनाक्रमों से बढ़ी कांग्रेस की चिंता
राज्य में कांग्रेस के लिए राज्यसभा चुनाव हमेशा चुनौतीपूर्ण रहे हैं। 2020 में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान बड़े पैमाने पर बगावत देखने को मिली थी, जिसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। उस समय कई विधायकों के इस्तीफे और दल-बदल ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे।
इसके अलावा राष्ट्रपति चुनावों में भी पार्टी को क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ा था, जिससे नेतृत्व की चिंता और बढ़ गई थी।
अब निगाहें 18 जून के मतदान पर
18 जून को होने वाले मतदान से पहले दोनों दलों में रणनीति और संपर्क अभियान तेज हो गया है। कांग्रेस जहां अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटी है, वहीं बीजेपी संभावित क्रॉस वोटिंग के जरिए अतिरिक्त फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिन मध्य प्रदेश की सियासत में और गर्मी ला सकते हैं।
Navyug Samachar