नेशनल डेस्क : रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा है कि भारत ने पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है, लेकिन देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी काफी काम किया जाना बाकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि गुजरात इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वडोदरा में आयोजित चौथी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि गुजरात अपनी मजबूत औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन और उद्यमशीलता की भावना के दम पर रक्षा विनिर्माण और रक्षा प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इसी तरह रक्षा निर्यात में भी बड़ी छलांग दर्ज की गई है। उनके अनुसार, 2014 में जहां रक्षा निर्यात करीब एक हजार करोड़ रुपये के स्तर पर था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि केवल शुरुआत है और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण के लिए अभी लंबी यात्रा बाकी है।
गुजरात बन सकता है रक्षा विनिर्माण का बड़ा केंद्र
रक्षा मंत्री ने कहा कि गुजरात तेजी से रक्षा उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सी-295 परिवहन विमानों का निर्माण किया जा रहा है, जो भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने यह भी बताया कि अत्याधुनिक स्व-चालित तोप प्रणाली के-9 वज्र का निर्माण भी गुजरात में किया जा रहा है। यह प्रणाली दुनिया की सबसे उन्नत स्व-चालित तोप प्रणालियों में गिनी जाती है और इससे भारतीय सेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विकसित भारत के लक्ष्य में उद्योगों की अहम भूमिका
राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना मजबूत अर्थव्यवस्था, उन्नत प्रौद्योगिकी और सशक्त राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर ही साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस जैसे मंच देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने क्षेत्रीय उद्योगों से आह्वान किया कि वे विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने में योगदान दें।
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