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विदेशी बाजारों में भारतीय निवेशकों की बल्ले-बल्ले! इन म्यूचुअल फंडों ने 1 साल में दिया 83% तक रिटर्न, जानिए कहां चमकी किस्मत

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में भले ही बीते एक साल में उतार-चढ़ाव देखने को मिला हो, लेकिन विदेशी बाजारों से जुड़े कई म्यूचुअल फंडों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। अमेरिका, जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में तेजी का फायदा भारतीय निवेशकों को भी मिला है। कुछ अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड योजनाओं ने एक साल में 50 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया, जबकि एक फंड ने करीब 83 प्रतिशत तक का मुनाफा दिया है।

विदेशी बाजारों की तेजी से अंतरराष्ट्रीय फंडों को मिला फायदा

पिछले एक साल में भारतीय और वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां भारतीय बाजार सूचकांकों में दबाव रहा, वहीं कई विदेशी बाजारों ने शानदार प्रदर्शन किया। खासतौर पर तकनीकी कंपनियों से जुड़े बाजारों में जबरदस्त तेजी आई, जिसका सीधा फायदा अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड योजनाओं को मिला।

अमेरिकी तकनीकी बाजार से जुड़े नैस्डैक सूचकांक में करीब 39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि ताइवान के बाजार सूचकांक में भी तेज उछाल देखने को मिला। वैश्विक बाजारों की इस मजबूती ने विदेशों में निवेश करने वाले भारतीय फंडों के रिटर्न को काफी बढ़ाया है।

किस फंड ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न?

आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड श्रेणी में एडलवाइस इमर्जिंग मार्केट्स अपॉर्चुनिटीज इक्विटी ऑफशोर फंड ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस फंड ने एक साल में 83.18 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।

इसके अलावा चीन केंद्रित, उभरते बाजारों और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों से जुड़े कई फंड भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंडों में शामिल रहे हैं।

कई फंडों में सिर्फ एसआईपी के जरिए निवेश की सुविधा

हालांकि, निवेशकों के लिए एक चुनौती भी बनी हुई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड योजनाओं में एकमुश्त निवेश और एसआईपी दोनों की सुविधा उपलब्ध है, जबकि कई बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंडों में नए एकमुश्त निवेश पर रोक लगी हुई है।

ऐसे फंडों में निवेशक केवल एसआईपी यानी नियमित किस्तों के जरिए ही पैसा लगा सकते हैं। इसके कारण कई निवेशक शानदार प्रदर्शन करने वाली योजनाओं में बड़ी राशि एक साथ निवेश नहीं कर पा रहे हैं।

टेक्नोलॉजी सेक्टर का रहा दबदबा

वैश्विक रिटर्न के आंकड़ों में सबसे बड़ा योगदान तकनीकी क्षेत्र का रहा है। अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की मजबूती का असर उन फंडों पर भी दिखा, जो नैस्डैक और टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कंपनियों में बढ़ती मांग ने वैश्विक तकनीकी बाजारों को मजबूती दी है।

उभरते बाजारों ने भी की शानदार वापसी

रिपोर्ट के मुताबिक, केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि चीन और अन्य उभरते बाजारों से जुड़े फंडों ने भी निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। कुछ मामलों में इन बाजारों से जुड़े फंडों का प्रदर्शन अमेरिकी बाजार आधारित फंडों से भी बेहतर रहा।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंडों के प्रदर्शन से साफ है कि वैश्विक बाजारों में निवेश का विकल्प भारतीय निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है। हालांकि, अलग-अलग देशों के बाजारों में जोखिम भी अलग-अलग होते हैं। इसलिए निवेश से पहले फंड की रणनीति, जोखिम और निवेश अवधि को समझना जरूरी है।

 

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