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AC, शॉवर और पानी की टंकियों में छिपा हो सकता है जानलेवा खतरा! जानें Legionnaires Disease से बचने के आसान तरीके

हेल्थ डेस्क: गर्मी और नमी वाले मौसम में घरों और इमारतों में इस्तेमाल होने वाले पानी के सिस्टम से जुड़ी एक गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। Legionnaires Disease नाम की यह बीमारी फेफड़ों का एक खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसे लेजियोनेला बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया एयर कंडीशनिंग सिस्टम, शॉवर, पाइपलाइन और पानी की टंकियों जैसी जगहों पर पनप सकता है।

अमेरिका में इस संक्रमण के कई मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पानी से जुड़े सिस्टम की साफ-सफाई और नियमित रखरखाव पर जोर दिया है। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सामान्य तौर पर नहीं फैलती, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर और जानलेवा हो सकती है।

क्या है Legionnaires Disease

Legionnaires Disease फेफड़ों का गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो लेजियोनेला नाम के बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से झीलों और नदियों के पानी में पाया जाता है, लेकिन जब यह इंसानों द्वारा बनाए गए पानी के सिस्टम में पहुंचकर तेजी से बढ़ने लगता है, तब खतरा पैदा होता है।

यह बैक्टीरिया खासतौर पर कूलिंग टावर, एयर कंडीशनिंग सिस्टम, हॉट टब, फव्वारे, पाइपलाइन, शॉवर और अन्य जल प्रणालियों में पनप सकता है। लंबे समय तक सफाई न होने और पानी के ठहराव से इसके बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे फैलता है यह संक्रमण

Legionnaires Disease संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलती। यह संक्रमण तब होता है जब कोई व्यक्ति लेजियोनेला बैक्टीरिया से संक्रमित पानी की बेहद छोटी बूंदों या भाप को सांस के जरिए अंदर ले लेता है।

बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंचकर संक्रमण पैदा करता है, जिसके बाद मरीज को निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर यह गंभीर रूप ले सकती है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:

तेज बुखार

ठंड लगना

लगातार खांसी

सांस लेने में परेशानी

खांसते या सांस लेते समय सीने में दर्द

शरीर और मांसपेशियों में दर्द

तेज सिरदर्द

अत्यधिक कमजोरी और थकान

मतली, उल्टी या दस्त

बुजुर्गों में भ्रम या मानसिक उलझन

किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है

Legionnaires Disease का खतरा कुछ लोगों में ज्यादा देखा जाता है। इनमें शामिल हैं:

50 साल या उससे अधिक उम्र के लोग

धूम्रपान करने वाले या पहले धूम्रपान कर चुके लोग

फेफड़ों की बीमारी जैसे COPD से पीड़ित मरीज

कैंसर का इलाज करा रहे लोग

ऑर्गन ट्रांसप्लांट करा चुके मरीज

HIV संक्रमित लोग

डायबिटीज, किडनी, लिवर या दिल की बीमारी से पीड़ित मरीज

इलाज में देरी पड़ सकती है भारी

अगर समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज न किया जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में गंभीर परेशानी, किडनी फेल होना, सेप्टिक शॉक और शरीर के कई अंगों के काम करना बंद करने जैसी स्थिति बन सकती है।

गंभीर मामलों में मरीज की मौत तक हो सकती है। हालांकि शुरुआती पहचान होने पर एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए इसका इलाज संभव है।

बचाव के लिए क्या करें

Legionnaires Disease से बचाव के लिए अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में साफ-सफाई और पानी के सिस्टम का सही रखरखाव सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।

घर और इमारतों में इस्तेमाल होने वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम, शॉवर, पाइपलाइन, ह्यूमिडिफायर और अन्य जल प्रणालियों की नियमित सफाई और डिसइन्फेक्शन जरूरी है।

इसके अलावा पानी को लंबे समय तक जमा या ठहरा हुआ नहीं रहने देना चाहिए। पानी की टंकियों और पाइपलाइन की समय-समय पर सफाई करने से इस बैक्टीरिया के बढ़ने का खतरा कम किया जा सकता है।

 

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