यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। अब यह नेटवर्क केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि छोटे जिलों और कस्बों तक भी अपनी पहुंच बना चुका है। असली दवाओं की खेप के साथ नकली दवाएं भी मेडिकल स्टोरों तक पहुंच रही हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
30 से ज्यादा जिलों में सक्रिय है नेटवर्क
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के अनुसार, लखनऊ समेत प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में नकली दवाओं का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। राजधानी का अमीनाबाद इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है, जहां से कई जिलों में दवाओं की सप्लाई की जाती है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ फुटकर दुकानों के साथ-साथ कुछ थोक विक्रेता भी नकली दवाओं की सप्लाई चेन तक पहुंच रखते हैं। राजधानी लखनऊ में करीब सात हजार थोक और फुटकर दवा दुकानें हैं, जहां प्रतिदिन 20 से 25 करोड़ रुपये की दवाओं की आपूर्ति होती है। इतने बड़े कारोबार के बीच नकली दवाओं की पहचान और उन पर निगरानी रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
छापेमारी में दो करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध दवाएं बरामद
पिछले एक वर्ष में एफएसडीए ने पुलिस के सहयोग से आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर करीब दो करोड़ रुपये से ज्यादा की संदिग्ध और नकली दवाएं बरामद की हैं। इन कार्रवाइयों के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
जांच में सामने आया कि कुछ गिरोह नामी दवा कंपनियों जैसी पैकिंग, रैपर, लेबल, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट तैयार कर नकली दवाओं को बाजार में उतार रहे थे। कई मामलों में पैकिंग पूरी तरह असली जैसी पाई गई।
असली दवाओं की खेप में मिलाकर होती है सप्लाई
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह सबसे पहले अधिक मांग वाली दवाओं को निशाना बनाते हैं। इसके बाद नकली दवाओं को असली दवाओं की खेप में मिलाकर थोक बाजार तक पहुंचाया जाता है। वहां से ये दवाएं छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों तक पहुंच जाती हैं।
कम कीमत और अधिक मुनाफे के लालच में कुछ कारोबारी अनजाने या जानबूझकर ऐसी दवाओं की बिक्री कर देते हैं। कई मामलों में जब मरीजों पर दवा का असर नहीं होता या दुष्प्रभाव सामने आते हैं, तब पूरे नेटवर्क का खुलासा होता है।
कारोबारियों को सतर्क रहने की सलाह
एफएसडीए अधिकारियों ने दवा कारोबारियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत वितरकों से ही दवाएं खरीदें और प्रत्येक खरीद का बिल सुरक्षित रखें। यदि किसी दवा की पैकिंग या गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो इसकी सूचना तुरंत एफएसडीए को दें।
एफएसडीए के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार के अनुसार, नकली दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सीधे लोगों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है। इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार सैंपलिंग, छापेमारी और मजबूत निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता है।
इन दवाओं की सबसे ज्यादा हो रही नकल
अब तक जिन दवाओं की नकली खेप पकड़ी गई है, उनमें ब्लड प्रेशर, मधुमेह, एंटीबायोटिक, गैस और ऑपरेशन के बाद घाव भरने में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
जांच में लखनऊ, गोंडा, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, अयोध्या, बाराबंकी, कानपुर नगर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा, बरेली, मुरादाबाद, झांसी, अलीगढ़, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद समेत कई जिलों में इस नेटवर्क की सक्रियता सामने आई है।
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