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यूपी का बड़ा दांव! 10 हजार स्टार्टअप्स तैयार करने का लक्ष्य, नई नीति से युवाओं और महिलाओं को मिलेगा जबरदस्त सहारा

यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश सरकार की नई स्टार्टअप पॉलिसी के जरिए राज्य स्टार्टअप सेक्टर में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश को देश के शीर्ष तीन स्टार्टअप राज्यों में शामिल करना और 10 हजार से अधिक स्टार्टअप्स के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके साथ ही युवाओं, महिलाओं, ट्रांसजेंडर, दिव्यांगजन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उद्यमियों को कारोबार शुरू करने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है।

क्या है नई स्टार्टअप पॉलिसी का लक्ष्य?

नई स्टार्टअप पॉलिसी, उत्तर प्रदेश की पहले लागू आईटी एवं स्टार्टअप पॉलिसी (2016 और 2017-22) के प्रावधानों को आगे बढ़ाती है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में शीर्ष तीन राज्यों में अपनी जगह बनाए।

इसके तहत प्रत्येक जिले में कम से कम एक इनक्यूबेटर स्थापित करने या उसे सहयोग देने की योजना है। साथ ही राज्य में 100 इनक्यूबेटर्स, 10 लाख वर्ग फुट इनक्यूबेशन एवं एक्सेलेरेशन स्पेस, 10 हजार से अधिक स्टार्टअप्स के लिए इकोसिस्टम, 8 अत्याधुनिक सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और लखनऊ में देश का सबसे बड़ा इनक्यूबेटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्टार्टअप्स को हर चरण में मिलेगी वित्तीय मदद

नई नीति के तहत शुरुआती चरण में काम कर रहे स्टार्टअप्स को एक साल तक हर महीने 17,500 रुपये का सस्टेनेंस अलाउंस दिया जाएगा। प्रत्येक इनक्यूबेटर के जरिए हर साल अधिकतम 25 स्टार्टअप्स को यह सुविधा मिलेगी।

मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (एमवीपी) तैयार करने के लिए 5 लाख रुपये तक का प्रोटोटाइप ग्रांट दिया जाएगा। वहीं, एमवीपी को बाजार में उतारने के लिए प्रत्येक स्टार्टअप को 7.5 लाख रुपये तक की सीड कैपिटल या मार्केटिंग सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस सुविधा पर भी प्रति इनक्यूबेटर अधिकतम 25 स्टार्टअप्स की सीमा लागू होगी।

पेटेंट और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए भी सहायता

नई नीति के तहत भारतीय पेटेंट दाखिल करने पर 2 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपये तक खर्च की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में भाग लेने पर 50 हजार रुपये और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए 1 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।

महिलाओं, दिव्यांगजन और पिछड़े क्षेत्रों को अतिरिक्त लाभ

यदि किसी स्टार्टअप में महिला, ट्रांसजेंडर या दिव्यांगजन सह-संस्थापक की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत से अधिक है तो सस्टेनेंस अलाउंस और सीड कैपिटल पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।

इसी तरह पूर्वांचल या बुंदेलखंड में पंजीकृत अथवा संचालित स्टार्टअप्स और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के सह-संस्थापक वाले स्टार्टअप्स को भी 50 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।

इनक्यूबेटर्स को भी मिलेगा सरकार का सहयोग

नई नीति में इनक्यूबेटर्स को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 करोड़ रुपये तक का कैपिटल ग्रांट दिया जाएगा, जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इनक्यूबेटर्स को यह सहायता 1.25 करोड़ रुपये तक मिल सकेगी।

इसके अलावा इनक्यूबेटर्स को पांच साल तक या आत्मनिर्भर बनने तक हर वर्ष 30 लाख रुपये तक का परिचालन सहयोग दिया जाएगा।

कम से कम 12 सप्ताह के एक्सेलेरेशन प्रोग्राम संचालित करने वाले संस्थानों को प्रत्येक स्टार्टअप पर 1 लाख रुपये तक का मैचिंग ग्रांट मिलेगा। प्रति प्रोग्राम अधिकतम 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। एक संस्थान साल में अधिकतम पांच प्रोग्राम चला सकेगा, जबकि पूरे प्रदेश में सालाना अधिकतम 100 प्रोग्राम इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

 

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