
बिहार डेस्क: सावन के पवित्र महीने में झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए जाने वाले शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। बिहार के मुंगेर जिले के असरगंज स्थित कच्ची कांवरिया पथ पर पूरा मार्ग भगवामय नजर आ रहा है। बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगातट से गंगाजल लेकर लाखों श्रद्धालु 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। इस दौरान अनोखी कांवड़ और कठिन तपस्या करने वाले शिवभक्त लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
डमरू के आकार की कांवड़ ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान
असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर झारखंड के धनबाद जिले के भूली निवासी अजय विश्वकर्मा अपनी डमरू के आकार की कांवड़ के कारण चर्चा में हैं। जैसे ही उनकी कांवड़ रास्ते में दिखाई देती है, श्रद्धालुओं की भीड़ उसे देखने के लिए जुट जाती है। अजय ने बताया कि इस कांवड़ को तैयार करने में काफी समय और मेहनत लगी है। इसका पूरा ढांचा लकड़ी और फाइबर से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जब लोग उनकी कांवड़ देखकर जयकारा लगाते हैं और आशीर्वाद देते हैं तो पूरी यात्रा की थकान दूर हो जाती है। उन्होंने बताया कि वह पिछले सात वर्षों से सुल्तानगंज से पैदल बाबाधाम की यात्रा कर रहे हैं और इस बार भगवान शिव के प्रिय वाद्य यंत्र डमरू के स्वरूप में कांवड़ बनाने का संकल्प लिया।
हाथों के बल बाबाधाम की यात्रा कर रहे ‘बिच्छू बम’
पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतो अपनी कठिन तपस्या के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वह दोनों पैरों को ऊपर उठाकर हाथों के बल ‘बिच्छू बम’ की मुद्रा में बाबाधाम की यात्रा कर रहे हैं। उनकी इस अनोखी साधना को देखकर रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु नतमस्तक हो रहे हैं।
12 ज्योतिर्लिंग और कई प्रमुख तीर्थों की कर चुके हैं यात्रा
राजकुमार महतो ने बताया कि पिछले दो वर्षों से वह देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम और 51 शक्तिपीठों में से 21 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा मथुरा, वृंदावन, खाटू श्याम, सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, जीण माता, तुंगनाथ, बागेश्वर धाम, चित्रकूट और अनुसूइया माता मंदिर सहित कई प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा भी कर चुके हैं।
दूसरी बार कर रहे हैं बिच्छू बम यात्रा
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पहली बार सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक हाथों के बल ‘बिच्छू बम’ के रूप में यात्रा की थी। इस बार वह दूसरी बार इसी तरह की यात्रा कर रहे हैं। पिछले वर्ष यात्रा पूरी करने में उन्हें एक महीने का समय लगा था, जबकि इस बार यात्रा के 12वें दिन वह असरगंज पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले यात्रा करने और साथ में साइकिल लेकर चलने के कारण इस बार उनकी रफ्तार कुछ धीमी है, लेकिन उनका उत्साह और आस्था पहले की तरह कायम है।
सरकार से की श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की मांग
राजकुमार महतो ने कहा कि बागेश्वर धाम की यात्रा के दौरान उन्हें विशेष आध्यात्मिक अनुभव हुआ, जिसके बाद उन्होंने अधिक से अधिक तीर्थस्थलों के दर्शन करने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि वह एक बार में करीब 60 से 70 फीट तक हाथों के बल चलते हैं और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। उन्होंने बिहार और झारखंड सरकार से अपील करते हुए कहा कि बंगला सावन की शुरुआत सामान्य सावन से पहले हो जाती है। ऐसे में शुरुआती दिनों में पश्चिम बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन और ठहरने की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती। यदि व्यवस्थाएं बंगला सावन शुरू होने के साथ ही उपलब्ध करा दी जाएं तो हजारों श्रद्धालुओं को राहत मिल सकती है।
Navyug Samachar