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अयोध्या चढ़ावा मामले में संतों को क्लीन चिट? सीएम योगी बोले- SIT जांच में किसी संत का नाम नहीं, विपक्ष पर साधा निशाना

यूपी डेस्क: अयोध्या दान यानी चढ़ावा मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक जांच में किसी भी संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर संत समाज तथा सनातन परंपरा का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

SIT की शुरुआती जांच में किसी संत का नाम नहीं आया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में करीब 1,100 से ज्यादा कर्मचारी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर केवल आठ लोगों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका सामने आई है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रारंभिक जांच और SIT की शुरुआती रिपोर्ट में किसी भी संत की संलिप्तता का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध करने वालों पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल आज इस मामले पर सवाल उठा रहे हैं, वही पहले राम जन्मभूमि आंदोलन और भगवान श्रीराम से जुड़े मुद्दों का विरोध करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के रामभक्त वर्ष 1990 की अयोध्या गोलीकांड की घटना को नहीं भूले हैं, जब रामभक्तों पर गोली चलाए जाने की घटना हुई थी।

कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है जांच

योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि यह मामला मंदिर में चढ़ाए गए दान से जुड़ा है और इसकी जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।

उन्होंने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ है। ऐसे में राज्य सरकार बिना ट्रस्ट के अनुरोध या अदालत के निर्देश के सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

मुख्यमंत्री के अनुसार, ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया था। इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी, आईजी स्तर के अधिकारी और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ विशेष सचिव स्तर के अधिकारी को शामिल किया गया है।

संतों पर टिप्पणी को बताया सनातन का अपमान

मुख्यमंत्री ने संसद में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सांसदों की ओर से संतों को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संत समाज पर टिप्पणी करना केवल संतों का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अपमान है।

विधानसभा में विपक्ष के हंगामे पर भी उठाए सवाल

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नियमों के तहत चर्चा कराने के लिए तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने चर्चा की जगह नारेबाजी, पोस्टरबाजी और सदन की कार्यवाही बाधित करने का रास्ता चुना।

उन्होंने कहा कि विधानसभा के नियम 59 के तहत जो मामला न्यायालय या किसी आयोग के विचाराधीन होता है, उस पर सामान्य तौर पर चर्चा नहीं की जा सकती। हालांकि विशेष परिस्थितियों में अध्यक्ष जांच प्रभावित न होने की स्थिति में चर्चा की अनुमति दे सकते हैं।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर भी विपक्ष पर हमला

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण दिए जाने के बावजूद विपक्षी नेताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे, वही आज आस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं।

 

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