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अनंत चतुर्दशी पर किस हाथ में बांधें अनंत सूत्र? पुरुष-महिलाओं के लिए अलग हैं नियम, 14 गांठों का भी है खास महत्व

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को है और इसी दिन गणपति विसर्जन भी किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है।

मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। अनंत सूत्र में लगी 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। इसे कलाई या भुजा पर बांधा जाता है और धार्मिक मान्यताओं में इसे संपन्नता बढ़ाने वाला सूत्र बताया गया है। अनंत सूत्र धारण करने से जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है।

क्या होता है अनंत सूत्र?

अनंत सूत्र सूती धागे से तैयार किया जाता है। इसे हल्दी और कुमकुम से रंगकर इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। वैदिक परंपरा में इन 14 गांठों को ब्रह्मांड के 14 लोकों का प्रतीक माना गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये सभी लोक अनंत स्वरूप में ही स्थित हैं। इसी वजह से अनंत चतुर्दशी का व्रत शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। अनंत को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है और इस दिन विष्णु पूजा का विधान है। अनंत सूत्र को पहले भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है और इसके बाद ही इसे धारण किया जाता है।

पुरुष और महिलाएं किस हाथ में बांधें अनंत सूत्र?

अनंत सूत्र मुख्य रूप से भुजा पर बांधा जाता है। हालांकि, भुजा में धारण करना संभव न हो तो इसे कलाई पर भी बांधा जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुरुषों को अनंत सूत्र दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए, जबकि विवाहित महिलाओं के लिए बायां हाथ निर्धारित माना जाता है।

कुंवारी लड़कियां अनंत सूत्र को दाहिने हाथ में बांध सकती हैं। विवाहित महिलाओं के लिए बायां हाथ सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उन्हें इसी हाथ में अनंत सूत्र धारण करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि विधि के अनुसार धारण किया गया अनंत सूत्र सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है।

किस समय बांधना चाहिए अनंत धागा?

अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत सूत्र धारण करने से पहले भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इसके लिए एक धागे में 14 गांठें लगाकर उसे भगवान विष्णु के सामने पूजा में रखा जाता है। पूजा पूरी होने के बाद इसे पुरुष और महिलाओं के लिए बताए गए नियम के अनुसार हाथ में बांधा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत सूत्र बांधने के बाद इससे जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए और इसे कम से कम 14 दिनों तक धारण करने की परंपरा बताई गई है। इस साल 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद अनंत सूत्र धारण किया जा सकता है।

 

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