
लाइफस्टाइल डेस्क: राजस्थान के लोकगीतों में आम जिंदगी, रिश्तों और भावनाओं को बेहद सहज अंदाज में पिरोया जाता है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी यहां के गीतों में प्रतीक बन जाती हैं। ऐसा ही एक चर्चित लोकगीत है ‘मिश्री को बाग लगा दे रसिया’, जिसमें पति-पत्नी की नोंकझोंक, प्यार, रूठना-मनाना और पड़ोसन को लेकर जलन जैसे भावों को बेहद दिलचस्प तरीके से पेश किया गया है।
दशकों पुराना यह लोकगीत इन दिनों एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसकी कहानी नीम की कड़वाहट से शुरू होती है और मिश्री की मिठास तक पहुंचती है। गीत में नायिका अपने साजन से नीम की निंबोली की कड़वाहट की शिकायत करते हुए कुछ मीठा मांगती है। इसी बहाने दोनों के रिश्ते की खट्टी-मीठी बातचीत आगे बढ़ती है।
नीम की कड़वाहट से मिश्री की मिठास तक
गीत की शुरुआत नायिका की इस शिकायत से होती है कि नीम की निंबोली उसे बहुत खारी यानी कड़वी लगती है। वह अपने प्रेमी से कहती है कि उसके लिए मिश्री का बाग लगा दे रसिया। यहां मिश्री मिठास का प्रतीक बन जाती है, जबकि नीम की निंबोली रिश्ते में मौजूद खटास को दर्शाती है।
लोकगीत की यही खासियत इसे आम प्रेम गीतों से अलग बनाती है। इसमें प्यार को सीधे शब्दों में बताने के बजाय रोजमर्रा की चीजों और बातचीत के जरिए भावनाओं को सामने रखा गया है।
मीठी बातों से साजन को रिझाती है नायिका
गीत में नायिका केवल शिकायत ही नहीं करती, बल्कि अपने साजन को मनाने के लिए उसकी खूब तारीफ भी करती है। वह पति के सांवले रंग और रंगीले अंदाज का जिक्र करते हुए मीठी-मीठी बातें करती है।
इस तरह गीत में पति-पत्नी के बीच होने वाली नोकझोंक का वह अंदाज नजर आता है, जिसमें शिकायत के साथ प्यार भी छिपा रहता है। नायिका अपनी बात मनवाने के लिए कभी ताना देती है तो कभी प्यार से साजन को रिझाती है।
पड़ोसन को देखकर नायिका के मन में उठती है जलन
लोकगीत की कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है, जब इसमें पड़ोसन का जिक्र आता है। नायिका सामने रहने वाली पड़ोसन के सजने-संवरने और उसके अंदाज को लेकर अपनी जलन जाहिर करती है।
गीत में पड़ोसन के तीखा सुरमा लगाने, ठुमककर चलने और छम-छम कदम बढ़ाने का जिक्र है। नायिका उसे सुंदर मानने के बावजूद उसकी तुलना खाली बर्तन और उजड़ी हुई क्यारी से करती है। इस तरह वह अपनी प्रतिद्वंद्विता और जलन को मजाकिया अंदाज में सामने रखती है।
साजन को पड़ोसन की ओर देखते पकड़ लेती है नायिका
गीत में नायिका की शिकायत यहीं खत्म नहीं होती। वह अपने साजन पर भी ताना कसती है। उसके मुताबिक, पति खुद खिड़की खोलकर छिप-छिपकर पड़ोसन को देखते हैं और फिर उसकी तरफ आकर्षित होने से इनकार करते हैं।
नायिका पड़ोसन को पति पर जादू करने या उन्हें अपने वश में करने वाली महिला तक कह देती है। इस पूरे प्रसंग में पति-पत्नी के बीच होने वाली छोटी-छोटी तकरार को हास्य और चुटीले अंदाज में पेश किया गया है।
रिश्तों की खट्टी-मीठी नोंकझोंक दिखाता है लोकगीत
‘मिश्री को बाग लगा दे रसिया’ सिर्फ मनोरंजन करने वाला गीत नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते में मौजूद अलग-अलग भावनाओं की तस्वीर भी पेश करता है। इसमें प्यार है, रूठना-मनाना है, अपने साथी पर अधिकार की भावना है और पड़ोसन को लेकर ईर्ष्या भी है।
यही वजह है कि इतने वर्षों बाद भी यह लोकगीत लोगों को अपनी ओर खींचता है। इसकी कहानी में रिश्तों की रोजमर्रा की नोंकझोंक और भावनाओं की ऐसी झलक मिलती है, जिससे सुनने वाला खुद को किसी न किसी रूप में जोड़ पाता है।
Navyug Samachar