
टेक्नोलॉजी डेस्क: बढ़ते बिजली बिल के बीच घर पर खुद बिजली पैदा करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसके लिए सोलर पैनल सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं, लेकिन अब मिनी विंड टर्बाइन यानी छोटी पवन चक्कियों का विकल्प भी लोगों के सामने है। ऐसे में सवाल है कि घर के लिए इन दोनों में से कौन सा सिस्टम ज्यादा बिजली बना सकता है और किसे लगाना ज्यादा किफायती रहेगा।
घर पर बिजली बनाने के लिए सोलर और मिनी पवन चक्की, दोनों के अपने फायदे और सीमाएं हैं। सही विकल्प का फैसला बिजली की जरूरत, मौसम, जगह और बजट को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।
कौन बना सकता है ज्यादा बिजली?
सोलर पैनल आमतौर पर दिन में 4 से 6 घंटे की पीक धूप के दौरान बिजली बनाते हैं। दूसरी ओर, मिनी पवन चक्की दिन और रात दोनों समय बिजली पैदा कर सकती है, लेकिन इसके लिए हवा की रफ्तार करीब 12 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा बनी रहना जरूरी है।
व्यावहारिक तौर पर देखें तो घरेलू बिजली उत्पादन के लिए सोलर पैनल ज्यादा भरोसेमंद और स्थिर विकल्प साबित होते हैं। 1 किलोवाट क्षमता वाला सोलर पैनल रोजाना औसतन 4 से 5 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। वहीं, इतनी ही क्षमता की पवन चक्की को इतनी बिजली बनाने के लिए तेज और लगातार हवा की जरूरत होती है।
रिहायशी इलाकों में अक्सर हवा लगातार एक समान गति से नहीं चलती। इसी वजह से मिनी पवन चक्कियां कई बार अपनी कुल क्षमता के सिर्फ 20 से 30 फीसदी तक ही बिजली पैदा कर पाती हैं।
सोलर और पवन चक्की लगाने में कितना खर्च?
लागत की बात करें तो सोलर सिस्टम घरेलू इस्तेमाल के लिए ज्यादा किफायती विकल्प बनता है। भारत में 1 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल करीब 50 से 60 हजार रुपये में लगवाया जा सकता है। इसके अलावा सरकार की ओर से सोलर सिस्टम पर सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे इसकी कुल लागत और कम हो सकती है।
इसके मुकाबले 1 किलोवाट क्षमता की मिनी पवन चक्की का सेटअप करीब 1.5 लाख रुपये तक पड़ सकता है। इस पर सोलर सिस्टम की तरह सब्सिडी उपलब्ध नहीं है। पवन चक्की में कई चलते हुए हिस्से होते हैं, इसलिए इसकी देखभाल पर भी ज्यादा खर्च आ सकता है।
इसके ब्लेड, गियर और बेयरिंग में समय के साथ घिसावट होती है। ऐसे में नियमित सर्विसिंग के साथ इन हिस्सों को बदलने का खर्च भी उठाना पड़ सकता है।
शहर में कौन सा विकल्प रहेगा बेहतर?
अगर आप शहर में रहते हैं और आपके घर की छत या आसपास ऐसी जगह मौजूद है, जहां पर्याप्त सीधी धूप पहुंचती है, तो सोलर सिस्टम ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। शहरों में मिनी विंड टर्बाइन को छत पर ऊंचे पोल पर लगाना आंधी जैसी परिस्थितियों में जोखिम भरा हो सकता है।
इसके अलावा पवन चक्की से पैदा होने वाली कंपन और आवाज आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बन सकती है। इसलिए शहरी इलाकों में घरेलू बिजली उत्पादन के लिए सोलर सिस्टम को प्राथमिकता देना ज्यादा व्यावहारिक माना जा सकता है।
हालांकि, अगर आपका घर ऐसे इलाके में है जहां पूरे साल अच्छी और लगातार हवा चलती रहती है, तो मिनी पवन चक्की लगाने पर विचार किया जा सकता है।
बजट हो तो हाइब्रिड मॉडल भी है विकल्प
अगर बजट आपके लिए बड़ी समस्या नहीं है, तो सोलर पैनल और मिनी पवन चक्की दोनों को मिलाकर हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा सकता है। इसमें सोलर पैनल दिन के समय बिजली बनाएंगे, जबकि मिनी पवन चक्की हवा की उपलब्धता के अनुसार दिन और रात बिजली पैदा कर सकती है। इस तरह दोनों प्रणालियों को साथ इस्तेमाल करके बेहतर बिजली बैकअप हासिल किया जा सकता है।
Navyug Samachar