Wednesday , 7 October 2026

काशी में आज बनेगा भारत-जापान दोस्ती का नया प्रतीक! शिंजो आबे की याद में ‘Abe Memorial Corridor’ का होगा लोकार्पण, ₹90 हजार करोड़ के निवेश से जुड़ा है रिश्ता

यूपी डेस्क: वाराणसी में भारत-जापान मैत्री और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘Abe Memorial Corridor’ का बुधवार को लोकार्पण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस मौके पर काशी से क्योटो तक के सांस्कृतिक रिश्ते, जापानी सहयोग से बने रुद्राक्ष सेंटर और उत्तर प्रदेश में जापान से जुड़े करीब 90 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की तस्वीर भी सामने आएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम से पहले सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास, विकास और दो प्राचीन संस्कृतियों की आत्मीयता का जीवंत सेतु बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

काशी से क्योटो तक ऐसे गहरी हुई दोस्ती

भारत-जापान संबंधों में वाराणसी का विशेष स्थान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दिसंबर 2015 में वाराणसी का दौरा किया था। दोनों नेताओं ने गंगा आरती में हिस्सा लिया था।

इससे पहले 2014 में नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की मुलाकात के दौरान वाराणसी और क्योटो के बीच पार्टनर सिटी समझौते को आगे बढ़ाया गया था। इस समझौते में संस्कृति, कला, विरासत संरक्षण और शहर के विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल था।

भारत-जापान सहयोग की प्रमुख निशानियों में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2021 में इसका उद्घाटन किया था। उस समय उन्होंने शिंजो आबे को याद करते हुए बताया था कि काशी यात्रा के दौरान रुद्राक्ष परियोजना के विचार पर उनकी आबे से चर्चा हुई थी और आबे ने अपने अधिकारियों को इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए थे।

जापानी सहयोग से तैयार हुआ रुद्राक्ष सेंटर

रुद्राक्ष सेंटर का निर्माण जापानी सहायता से हुआ है और इसे भारत-जापान साझेदारी के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस परियोजना में जापान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस केंद्र को सांस्कृतिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मंच के रूप में विकसित किया गया है।

रुद्राक्ष सेंटर में करीब 1,200 लोगों की क्षमता वाला मुख्य सभागार, बैठक कक्ष और कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसकी वास्तुकला में भारतीय और जापानी शैली का मेल दिखाई देता है।

शिंजो आबे की विरासत से 90 हजार करोड़ के निवेश तक

भारत-जापान संबंध अब सिर्फ सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को भी रेखांकित किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के इन्वेस्ट यूपी के अनुसार, जापान से उत्तर प्रदेश में करीब 90,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापन हुए हैं। इन प्रस्तावों में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और औद्योगिक ढांचे जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सरकार के मुताबिक, जापानी कंपनियों के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को उत्तर प्रदेश के विनिर्माण आधार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रीन हाइड्रोजन से नई तकनीक तक बढ़ा सहयोग

उत्तर प्रदेश और जापान के बीच सहयोग अब पारंपरिक औद्योगिक निवेश से आगे बढ़कर नई तकनीकों तक पहुंच रहा है। फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा के दौरान यामानाशी प्रीफेक्चर के साथ ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाया गया।

इन्वेस्ट यूपी के अनुसार, प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शोध, तकनीकी विकास, कौशल प्रशिक्षण और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी परियोजनाओं पर काम किया जाना है।

अगस्त 2026 में भी उत्तर प्रदेश और जापान के बीच मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, रोजगार, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर कई पहल सामने आईं। इन्वेस्ट यूपी ने अगस्त में 200 से अधिक जापानी प्रतिनिधियों की भागीदारी वाले यूपी-जापान निवेश सम्मेलन की भी जानकारी दी थी।

‘Abe Memorial Corridor’ बनेगा दोस्ती की नई पहचान

शिंजो आबे की स्मृति में ‘Abe Memorial Corridor’ का लोकार्पण सिर्फ एक स्मृति कार्यक्रम नहीं है। यह भारत-जापान संबंधों की उस निरंतर यात्रा का प्रतीक है, जिसमें काशी-क्योटो के सांस्कृतिक रिश्तों से लेकर निवेश, तकनीक, विनिर्माण और ग्रीन एनर्जी तक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी भावना को “काशी से क्योटो तक, आस्था से अर्थव्यवस्था तक” की मैत्री के रूप में प्रस्तुत किया है। अब शिंजो आबे की स्मृति से जुड़ा यह नया प्रतीक काशी में भारत-जापान रिश्तों की कहानी को एक नई पहचान देगा।

 

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