
धर्म डेस्क: वैदिक पंचांग के अनुसार, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जा रही है। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होता है और श्रद्धालु अपने पूर्वजों का श्राद्ध एवं तर्पण कर उन्हें विदाई देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या के दिन कुछ वस्तुओं को घर लाना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इन चीजों की खरीदारी से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं। आइए जानते हैं कि इस दिन किन वस्तुओं को खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
लोहे का सामान खरीदने से करें परहेज
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या के दिन लोहा या लोहे से बनी वस्तुएं खरीदकर घर नहीं लानी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं और शनि दोष का प्रभाव भी पड़ सकता है। इसी वजह से इस दिन लोहे की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।
सरसों का तेल न खरीदें
मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन सरसों का तेल खरीदना शुभ नहीं माना जाता। हालांकि, घर में पहले से मौजूद सरसों के तेल से पितरों और शनिदेव के निमित्त दीपक जलाना शुभ माना गया है। इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
धारदार और नुकीली वस्तुएं घर न लाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन चाकू, कैंची, सुई, कील या अन्य धारदार एवं नुकीली वस्तुओं की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन वस्तुओं को इस दिन घर लाने से परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद और कलह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
नए कपड़े और जूते-चप्पल खरीदने से बचें
पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का समय माना जाता है। इसी कारण धार्मिक मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपने लिए नए कपड़े, जूते या चप्पल नहीं खरीदने चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से शुभ फलों में कमी आ सकती है और जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं। इनका वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक नहीं है और इन्हें श्रद्धा एवं परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
Navyug Samachar