Saturday , 10 October 2026

CJP Protest के बीच याद आया नाना पाटेकर का वो बयान, बोले थे- युवा अब सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं, नतीजे चाहता है

मनोरंजन डेस्क: अभिनेता नाना पाटेकर की बेबाक बातें और समाज को लेकर उनका नजरिया एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और बदलते राजनीतिक माहौल के बीच उनका साल 2015 का एक पुराना बयान याद किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने नई पीढ़ी की सोच और नेताओं से उसकी उम्मीदों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी थी। नाना ने कहा था कि आज का युवा सवाल करता है, जागरूक है और लंबे समय तक सिर्फ वादों के भरोसे इंतजार करने को तैयार नहीं है।

नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। करीब पांच दशक लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा की कई यादगार फिल्मों में काम किया। हालांकि, उनकी पहचान सिर्फ अभिनेता के तौर पर नहीं रही, बल्कि अपनी साफगोई और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाले व्यक्ति के रूप में भी रही।

राजनीति में आने के प्रस्ताव मिले, लेकिन ठुकरा दिए

नाना पाटेकर ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें कई राजनीतिक दलों की ओर से राजनीति में आने के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन उन्होंने उन्हें स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि वह गलत को गलत कहने से पीछे नहीं हट सकते।

नाना का मानना था कि अगर वह किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनते और उसी पार्टी से जुड़ा कोई व्यक्ति गलत करता, तो उनके लिए उसका बचाव करना संभव नहीं होता। उनके मुताबिक, राजनीति में कई बार पार्टी हितों के कारण अपने लोगों का बचाव करना पड़ता है, जबकि वह इस तरह का समझौता नहीं कर सकते थे।

समाज की बात रखने के लिए राजनीति जरूरी नहीं: नाना

नाना पाटेकर का मानना था कि अपनी बात समाज तक पहुंचाने के लिए राजनीति में जाना जरूरी नहीं है। उन्होंने सिनेमा को अपना माध्यम बताया था और कहा था कि फिल्मों के जरिए भी समाज तक विचार पहुंचाए जा सकते हैं।

उनका कहना था कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति की अपनी राय होनी चाहिए। किसी नेता या पार्टी का समर्थन करना अलग बात है, लेकिन अपनी सोच और विचार रखना बेहद जरूरी है।

नई पीढ़ी पांच साल इंतजार करने को तैयार नहीं

नाना पाटेकर ने बदलती युवा सोच पर बात करते हुए कहा था कि आज की पीढ़ी पहले से ज्यादा जागरूक है। वह सवाल करती है और परिणाम चाहती है। उनके मुताबिक, उनकी पीढ़ी कई बार पांच साल तक इंतजार कर लेती थी, लेकिन नई पीढ़ी का नजरिया बदल चुका है।

उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा था कि पहले अगर भारत विश्व कप में हार जाता था, लेकिन सचिन तेंदुलकर शतक बना देते थे तो लोग उसमें भी खुशी ढूंढ लेते थे। लेकिन आज का युवा पूरी टीम से बेहतर प्रदर्शन और जीत की उम्मीद करता है।

युवा सिर्फ चुनावी वादे सुनकर संतुष्ट नहीं होगा

नाना पाटेकर का कहना था कि नई पीढ़ी सिर्फ वादों के भरोसे रहने वाली नहीं है। वह नतीजे देखना चाहती है और इसी बदलाव के कारण नेताओं को भी चुनावी वादे सोच-समझकर करने होंगे।

उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी सरकार के लिए रातोंरात बदलाव लाना संभव नहीं है। व्यवस्था और वर्षों से चली आ रही समस्याओं को सुधारने में समय लगता है, लेकिन जनता अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होगी।

हीरो बनने से ज्यादा इंसान बने रहना जरूरी

फिल्मी किरदारों को लेकर भी नाना पाटेकर की सोच अलग थी। उनका मानना था कि हीरो होने का मतलब असंभव कारनामे करना नहीं, बल्कि इंसान बने रहना है।

अपनी चर्चित फिल्म “अब तक छप्पन” के पुलिस किरदार को लेकर उन्होंने कहा था कि उनका चेहरा ही उनकी बंदूक है। उनके लिए अभिनय में बनावटी आक्रामकता से ज्यादा जरूरी भावनाओं की सच्चाई थी।

तकनीक से ज्यादा लोगों के चेहरों को पढ़ना पसंद था

बदलती तकनीक और सोशल मीडिया के दौर को लेकर भी नाना का नजरिया अलग था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अब वह सीनियर सिटीजन हो गए हैं और यह नई पीढ़ी का जमाना है।

उन्होंने बताया था कि वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से बातचीत के लिए करते हैं। इंटरनेट और ईमेल की ज्यादा जानकारी नहीं होने के बावजूद वह इसे कमजोरी नहीं मानते थे। उनका कहना था कि अगर वह हर समय फोन और इंटरनेट में व्यस्त रहेंगे तो लोगों के चेहरे और भाव कैसे समझ पाएंगे।

नाना की एक बात उनकी सोच को बेहद खास तरीके से बताती है। उनका कहना था कि वह फोन में चीजें डाउनलोड करने की बजाय लोगों के चेहरों को अपनी आंखों से डाउनलोड करना पसंद करते हैं।

स्टारडम से ज्यादा सादगी को दी अहमियत

नाना पाटेकर हमेशा सादगी और सहज जीवन के लिए जाने जाते रहे। उन्हें सिर्फ लोकप्रियता दिखाने में विश्वास नहीं था। उनका मानना था कि कैमरा ऑन होने पर वह अभिनेता हैं, लेकिन कैमरा बंद होते ही वह एक आम इंसान हैं।

उनकी बेबाकी, सादगी और समाज को लेकर सोच ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। यही वजह है कि उनके अभिनय के साथ-साथ उनके विचार भी लोगों के बीच लंबे समय तक याद किए जाते रहेंगे।

 

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