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आजमगढ़ की 5 विधानसभा सीटों पर किसका दबदबा? सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, BJP-BSP भी मजबूत स्थिति में

यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्वांचल की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले आजमगढ़ जिले की पांच विधानसभा सीटों पर भी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इन पांचों सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन चुनावी आंकड़े बताते हैं कि कई सीटों पर भाजपा और बसपा ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।

मुबारकपुर, आजमगढ़ सदर, दीदारगंज, लालगंज और मेंहनगर विधानसभा सीटों पर सपा की जीत का अंतर अलग-अलग रहा था। कहीं मुकाबला करीबी रहा तो कहीं सपा ने बड़ी बढ़त हासिल की। ऐसे में 2027 के चुनाव में सपा के सामने अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा और बसपा अपने वोट आधार को बढ़ाने की कोशिश करेंगी।

मुबारकपुर में सपा की बड़ी जीत, लेकिन चार दलों के बीच रहा मुकाबला

मुबारकपुर विधानसभा सीट पर 2022 में समाजवादी पार्टी के अखिलेश को 80,726 वोट मिले थे। उन्हें कुल मतों का 36.02 प्रतिशत समर्थन हासिल हुआ था। भाजपा के अरविंद जायसवाल को 51,623 वोट यानी 23.03 प्रतिशत मत मिले।

बसपा के अब्दुस्सलाम को 48,734 वोट और एआईएमआईएम के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को 36,460 वोट मिले थे। सपा ने इस सीट पर 29,103 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

इस सीट पर मुस्लिम, यादव, दलित और पिछड़े वर्गों के मतों की भूमिका अहम मानी जाती है। सपा के लिए जहां पारंपरिक समीकरण मजबूत रहे हैं, वहीं भाजपा और बसपा की मौजूदगी आगामी चुनाव में मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है।

आजमगढ़ सदर में सपा की बढ़त, भाजपा का मजबूत वोट बैंक

आजमगढ़ सदर विधानसभा सीट पर सपा के दुर्गा प्रसाद यादव ने 1,00,813 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। भाजपा के अखिलेश कुमार मिश्रा को 84,777 वोट मिले, जबकि बसपा के सुशील कुमार सिंह को 39,281 वोट हासिल हुए।

सपा ने भाजपा को 16,036 वोटों से हराया था। हालांकि, भाजपा को इस सीट पर 35.87 प्रतिशत वोट मिले थे, जो उसके मजबूत जनाधार को दिखाता है।

आजमगढ़ सदर सीट पर दुर्गा प्रसाद यादव का राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रियता सपा के लिए अहम रही है। वहीं भाजपा इस सीट पर अपने वोट प्रतिशत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।

दीदारगंज में सबसे करीबी मुकाबला, राजभर राजनीति अहम फैक्टर

दीदारगंज विधानसभा सीट पर 2022 में सपा के कमलाकांत राजभर को 74,342 वोट मिले थे। भाजपा के कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा को 60,781 वोट और बसपा के भूपेंद्र सिंह को 47,094 वोट मिले थे।

सपा ने यहां 13,561 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी, जो इन पांचों सीटों में सबसे कम अंतर था।

इस सीट पर राजभर समुदाय और गैर-यादव पिछड़े वर्गों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। 2022 में सपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के गठबंधन का भी असर देखने को मिला था। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के कारण 2027 में मुकाबला अलग हो सकता है।

लालगंज में सपा की बढ़त, बसपा का भी मजबूत आधार

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित लालगंज विधानसभा सीट पर 2022 में सपा के बेचई सरोज को 83,767 वोट मिले थे। भाजपा की नीलम सोनकर को 69,034 वोट और बसपा के आजाद अरिमर्दन को 57,809 वोट हासिल हुए थे।

सपा ने इस सीट पर 14,733 वोटों से जीत दर्ज की थी। हालांकि, बसपा को मिले 26.44 प्रतिशत वोट बताते हैं कि उसका आधार अभी भी इस सीट पर मजबूत है।

आरक्षित सीट होने के कारण दलित मतदाताओं का रुझान चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभा सकता है। भाजपा और बसपा दोनों ही इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेंगी।

मेंहनगर में सपा का दबदबा, भाजपा और बसपा भी मैदान में

मेंहनगर विधानसभा सीट भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2022 में सपा की पूजा सरोज को 86,960 वोट मिले थे। भाजपा की मंजू सरोज को 72,811 वोट और बसपा के पंकज कुमार को 50,173 वोट मिले थे।

सपा ने इस सीट पर 14,149 वोटों से जीत हासिल की थी। भाजपा को 32.94 प्रतिशत और बसपा को 22.70 प्रतिशत वोट मिले थे।

मेंहनगर में सपा का चुनावी इतिहास मजबूत रहा है, लेकिन भाजपा और बसपा के वोट प्रतिशत को देखते हुए आगामी चुनाव में मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है।

2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों से बढ़ा सियासी महत्व

2024 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ और लालगंज दोनों संसदीय सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मुद्दे और समीकरण अलग होते हैं, इसलिए इन नतीजों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।

2027 में सपा के सामने 2022 के समर्थन को बनाए रखने की चुनौती होगी। भाजपा को अपने वोट आधार को सीटों में बदलने की कोशिश करनी होगी, जबकि बसपा अपने पुराने मत प्रतिशत को दोबारा मजबूत राजनीतिक समर्थन में बदलने की रणनीति पर काम करेगी।

पांच सीटों का चुनावी गणित क्या कहता है

2022 के आंकड़ों के अनुसार, इन पांचों सीटों पर सपा की जीत का अंतर 13,561 से 29,103 वोटों के बीच रहा था। मुबारकपुर में बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिला था, आजमगढ़ सदर में भाजपा का वोट आधार मजबूत रहा, दीदारगंज में मुकाबला सबसे करीबी रहा, जबकि लालगंज और मेंहनगर में बसपा ने भी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई।

2027 का चुनाव इन सीटों पर स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों, गठबंधन और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।

 

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