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Nobel Peace Prize: कैसे मिलता है शांति का नोबेल पुरस्कार? जानिए चयन प्रक्रिया और भारत के किन लोगों को मिला सम्मान

नेशनल डेस्क: नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने शांति, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर भी दुनियाभर में चर्चा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यह पुरस्कार क्यों दिया जाता है, विजेता का चयन कैसे होता है और भारत से किन लोगों को यह सम्मान मिल चुका है।

अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत से हुई शुरुआत

नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत स्वीडिश वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर हुई थी। अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी संपत्ति का उपयोग उन लोगों को सम्मानित करने के लिए करने की इच्छा जताई थी, जिन्होंने मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

उनकी वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने, स्थायी सेनाओं को कम करने या समाप्त करने और शांति सम्मेलनों को प्रोत्साहित करने जैसे कार्यों का उल्लेख किया गया था। पहली बार नोबेल शांति पुरस्कार साल 1901 में दिया गया था।

किस आधार पर दिया जाता है शांति का नोबेल

नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे लोगों या संस्थाओं को दिया जाता है, जिन्होंने दुनिया में शांति स्थापित करने, संघर्ष कम करने, मानवाधिकारों की रक्षा करने या अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया हो।

यह पुरस्कार किसी व्यक्ति के साथ-साथ किसी संगठन को भी दिया जा सकता है।

विजेता का चयन करती है नॉर्वेजियन नोबेल समिति

नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता का चयन नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है। इस समिति में पांच सदस्य होते हैं, जिन्हें नॉर्वे की संसद नियुक्त करती है।

पुरस्कार चयन की प्रक्रिया में सबसे पहले योग्य व्यक्तियों या संस्थाओं के नामांकन आते हैं। इसके बाद समिति उम्मीदवारों के काम की समीक्षा करती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद से उनके योगदान का मूल्यांकन किया जाता है और फिर अंतिम विजेता का फैसला किया जाता है।

किसी व्यक्ति या संस्था का नामांकन होना पुरस्कार मिलने की गारंटी नहीं होता।

नोबेल शांति पुरस्कार से जुड़े खास तथ्य

1901 से अब तक नोबेल शांति पुरस्कार कई बार दिया जा चुका है। इसमें पुरुषों, महिलाओं और संगठनों को सम्मानित किया गया है।

इस पुरस्कार के लिए नामांकन करने वालों के नाम आमतौर पर 50 वर्षों तक गोपनीय रखे जाते हैं। विजेता को सम्मान समारोह में नोबेल मेडल और डिप्लोमा दिया जाता है।

नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की विजेता मलाला यूसुफजई हैं, जिन्हें साल 2014 में 17 वर्ष की उम्र में यह सम्मान मिला था। वहीं, जोसेफ रोटब्लाट सबसे उम्रदराज विजेता रहे, जिन्हें साल 1995 में 86 वर्ष की उम्र में पुरस्कार मिला था।

साल 1905 में बर्था फॉन ज़ुटनर नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली पहली महिला बनी थीं। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति को यह पुरस्कार तीन बार मिल चुका है। वहीं, वियतनामी नेता ले डुक थो साल 1973 में नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकार करने से इनकार करने वाले एकमात्र व्यक्ति रहे हैं।

भारत से इन दो हस्तियों को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

भारत से जुड़ी दो प्रमुख हस्तियों को नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है।

मदर टेरेसा को साल 1979 में मानवता की सेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने अपना अधिकांश सेवाकार्य भारत में किया और भारतीय नागरिकता भी ली थी।

इसके अलावा कैलाश सत्यार्थी को साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से बच्चों और युवाओं के शोषण के खिलाफ संघर्ष तथा सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए किए गए प्रयासों के लिए मिला था।

कैलाश सत्यार्थी लंबे समय से बाल श्रम और बाल शोषण के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं।

 

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