Friday , 16 October 2026

नवंबर में नई आयुष नीति-2026 पर मुहर लगा सकती है योगी सरकार, निवेशकों को मिलेगी राहत; रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की तैयारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयुष चिकित्सा पद्धतियों, उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार नई आयुष नीति-2026 लाने की तैयारी में है। सरकार नवंबर में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी दे सकती है। इसके तहत आयुष क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, शोध को प्रोत्साहित करने, अस्पतालों की सुविधाएं बेहतर बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है और इसे कैबिनेट के सामने रखने की प्रक्रिया चल रही है।

निवेशकों को पूंजी अनुदान और स्टांप शुल्क में छूट देने की तैयारी

नई आयुष नीति-2026 में आयुष उद्योग से जुड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। इसमें पूंजी अनुदान, भूमि खरीद पर स्टांप शुल्क में छूट और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए विशेष रियायतें शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में आयुष से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना और इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना है।

नीति के जरिए आयुष उद्योग को प्रोत्साहन देने के साथ उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस केंद्रों पर रहेगा जोर

प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में आयुष कारोबार को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत नई आयुष नीति का मसौदा तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि नवंबर में कैबिनेट से इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।

नई नीति में पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस केंद्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही आयुष से जुड़ी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और शोध गतिविधियों का विस्तार करने की योजना है, ताकि उत्तर प्रदेश को आयुष अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

आयुष अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं का होगा विस्तार

नई नीति के तहत आयुष अस्पतालों में मरीजों के उपचार की व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से अस्पतालों के निर्माण को प्रोत्साहित करने की योजना है।

इसके अलावा, आयुष औषधियों की जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। नीति का उद्देश्य मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आयुष विभाग की सेवाओं का विस्तार करना है।

आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी से जुड़े पाठ्यक्रमों से बढ़ेंगे अवसर

नई आयुष नीति में शिक्षा और प्रशिक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। प्रस्ताव के तहत आयुष अस्पतालों के विकास और क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी से संबंधित पाठ्यक्रम शुरू करने को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इससे आयुष क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

आयुष अनुसंधान और उद्योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की योजना

नई नीति का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश में आयुष से संबंधित अनुसंधान, औषधियों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के साथ इस क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं और नए विचारों को शामिल करने की दिशा में काम कर रही है।

प्रस्तावित नीति के जरिए आयुष उद्योग के विस्तार, निवेश को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने की योजना है। हालांकि, नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिलने और इसके अंतिम प्रावधान तय होने के बाद ही निवेशकों तथा आयुष क्षेत्र से जुड़े संस्थानों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट होगी।

 

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