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शादी से पहले रिश्तों की पाठशाला लगाएगा गोवा का कॉलेज! 15 दिन के कोर्स में युवाओं को सिखाई जाएगी वैवाहिक जीवन की समझ

गोवा डेस्क: करियर बनाने के लिए युवा कई साल पढ़ाई और तैयारी में बिताते हैं, लेकिन शादी और पारिवारिक जीवन की जिम्मेदारियों के लिए अक्सर कोई विशेष तैयारी नहीं करते। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से गोवा के एक कॉलेज ने युवाओं के लिए विवाह-पूर्व तैयारी से जुड़ा विशेष प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल की है। ‘मैरिज रेडीनेस: प्रिपेयरिंग फॉर हेल्दी एंड लास्टिंग रिलेशनशिप्स’ नाम के इस पाठ्यक्रम में युवाओं को शादी से पहले मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार होने, जीवनसाथी को समझने और रिश्तों में आपसी तालमेल बनाने के तरीके बताए जाएंगे।

गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस के मानव विकास एवं परिवार अध्ययन विभाग की ओर से यह पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पई के अनुसार, इसका आयोजन 2 से 17 दिसंबर 2026 तक होगा। 15 दिनों के इस कार्यक्रम में युवाओं को वैवाहिक जीवन और परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी।

रिश्तों की जिम्मेदारियों को समझने पर रहेगा जोर

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल शादी की तैयारी कराना नहीं है। इसके तहत युवाओं को वैवाहिक रिश्तों की जिम्मेदारियों, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने और शादी के बाद सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए तैयार किया जाएगा। साथ ही स्वस्थ और लंबे समय तक टिकने वाले रिश्ते बनाने से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी दी जाएगी।

सरकार भी विवाह-पूर्व परामर्श शुरू करने की तैयारी में

गोवा में यह पहल ऐसे समय हो रही है, जब राज्य सरकार भी विवाह से पहले परामर्श की व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने पणजी में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार राज्यभर में शादी से पहले परामर्श की सुविधा शुरू करना चाहती है। इसका उद्देश्य वैवाहिक रिश्तों में आने वाली परेशानियों को कम करना और तलाक के मामलों पर रोक लगाने में मदद करना है।

राज्य के कानून विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच गोवा की दीवानी अदालतों में शादी और तलाक से जुड़े 3,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें अकेले 2024 में 947 मामले सामने आए थे।

कौन कर सकता है आवेदन?

कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पई के अनुसार, इस पाठ्यक्रम के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा अविवाहित युवा और स्वस्थ रिश्ते बनाने की इच्छा रखने वाले अन्य लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

शादी से पहले भावनात्मक समझ विकसित करने की पहल

आज के दौर में करियर, आर्थिक दबाव, उच्च शिक्षा और सही जीवनसाथी की तलाश जैसे कारणों से शादी में देरी हो रही है। विवाह के बाद भी नौकरी, एक-दूसरे से दूर रहना, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आपसी अपेक्षाएं रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती हैं।

ऐसे में विवाह-पूर्व परामर्श के माध्यम से युवाओं को भावनात्मक समझ, आपसी सम्मान, बातचीत और मतभेदों को सुलझाने जैसे विषयों की जानकारी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पाठ्यक्रम का मकसद युवाओं पर शादी का दबाव बनाना नहीं, बल्कि उन्हें रिश्तों की वास्तविकताओं को समझकर अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने में सक्षम बनाना है।

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