नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दी है। आजम खान ने ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से उनकी जमानत याचिका पर 16 नवंबर को अंतरिम आदेश पारित करने को कहा है।यह मामला दो पैन कार्ड से जुड़े केस में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला खान की सजा निलंबित होने के बाद हुई ईडी की कार्रवाई से जुड़ा है। 29 अक्टूबर को उनकी सजा निलंबित की गई थी। इसके कुछ समय बाद ईडी ने आजम खान को गिरफ्तार कर लिया था।
दो दिन में हाईकोर्ट पहुंचेगी याचिका
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका दो दिनों के भीतर इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले में सुनवाई के लिए हाई कोर्ट उचित मंच है और वहीं जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।
हिरासत में भेजने के आदेश को भी दी चुनौती
आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उनकी याचिका में एक नवंबर को पारित उस आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसके तहत विशेष अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत देते हुए हिरासत से रिहा करने की मांग की थी।
कपिल सिब्बल ने गिरफ्तारी और मुकदमे पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आजम खान की ओर से जमानत की मांग की। उन्होंने अदालत में कहा कि आजम खान करीब 80 वर्ष के हैं और उनके खिलाफ कई अन्य मामले भी हैं। सिब्बल ने दलील दी कि आजम खान सभी मामलों का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी की गिरफ्तारी का मकसद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान आजम खान को जेल में रखना है। सिब्बल के मुताबिक, आजम खान के जेल से बाहर आने के बाद ईडी ने उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया।
2006 के मामले में PMLA लगाने पर भी सवाल
कपिल सिब्बल ने दलील दी कि मामले की कथित घटनाएं वर्ष 2006 की हैं, जबकि एफआईआर 2019 में दर्ज हुई थी। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
सिब्बल ने शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि इनमें घर में घुसकर नकदी और सोने की बालियां लूटने, परिवार को धमकाने तथा बकरियां ले जाने जैसे आरोप शामिल हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे आरोपों को अपराध से अर्जित आय से कैसे जोड़ा जा सकता है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वरिष्ठ वकील की दलीलों में दम हो सकता है, लेकिन अदालत इस स्तर पर कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहती। अब आजम खान की जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर नजर रहेगी।
Navyug Samachar