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2030 में अहमदाबाद रचेगा कॉमनवेल्थ गेम्स का नया इतिहास, दुनिया को दिखेगी भारत की खेल ताकत; टीम इंडिया की नजर नंबर-1 पर

स्पोर्ट्स डेस्क: कॉमनवेल्थ गेम्स के 100वें साल में भारत दुनिया के सामने एक भव्य खेल आयोजन की मिसाल पेश करने की तैयारी कर रहा है। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के समापन समारोह के बाद भारत को आधिकारिक तौर पर फ्लैग और बैटन सौंप दिया गया। अब अहमदाबाद 2030 में इन खेलों की मेजबानी करेगा, जहां भारत की कोशिश न सिर्फ शानदार आयोजन करने की होगी, बल्कि पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल करने की भी होगी।

अहमदाबाद 2030 होगा भारत की खेल शक्ति का बड़ा परीक्षण

अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स को भारत के खेल भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसे 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी की दिशा में एक बड़े परीक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है।

भारत की योजना ऐसे आयोजन की है, जो दुनिया के बड़े खेल आयोजनों की बराबरी कर सके। इसमें आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुविधाओं और बेहतर खेल ढांचे के जरिए भारत अपनी क्षमता दिखाने की तैयारी में है।

ग्लासगो से अहमदाबाद पहुंचा कॉमनवेल्थ का ध्वज

ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो एरेना में हुए समापन समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और स्टार जैवलिन खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के जरिए अहमदाबाद के प्रतिनिधियों को सौंपा गया।

भारतीय प्रस्तुति के दौरान शिव तांडव, वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम में भारत की संस्कृति और वसुधैव कुटुंबकम के संदेश को भी प्रमुखता से पेश किया गया।

100वें साल में सबसे खास होंगे कॉमनवेल्थ गेम्स

1930 में कनाडा के हैमिल्टन से शुरू हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे होने के मौके पर अहमदाबाद आयोजन की मेजबानी करेगा। उस समय सिर्फ 11 देशों के करीब 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि 2030 में 74 देशों के 4 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों के शामिल होने की उम्मीद है।

इन खेलों में 15 से ज्यादा खेलों को शामिल किया जा सकता है। भारत इसे अब तक के सबसे बड़े और यादगार कॉमनवेल्थ गेम्स में बदलने की तैयारी कर रहा है।

बीजिंग, लंदन और लॉस एंजेल्स जैसे आयोजनों से मुकाबले की तैयारी

अहमदाबाद 2030 को सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि भारत की आर्थिक, तकनीकी और संगठनात्मक क्षमता दिखाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

ग्लासगो गेम्स सीमित खेलों और पहले से मौजूद सुविधाओं के इस्तेमाल के साथ आयोजित किए गए थे। वहीं भारत अहमदाबाद आयोजन को लंबे समय तक याद रहने वाली विरासत के रूप में तैयार करना चाहता है।

क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी और खो-खो से बढ़ेगी पदकों की उम्मीद

अहमदाबाद 2030 में शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, क्रिकेट और हॉकी के साथ-साथ कबड्डी, खो-खो और मल्लखंब जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों को शामिल करने पर चर्चा चल रही है।

इन खेलों के जरिए भारत को पदक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने की उम्मीद है। घरेलू मैदान और पसंदीदा खेलों का फायदा उठाकर भारत ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों को चुनौती देने की तैयारी करेगा।

ग्लासगो में भारत ने 39 पदकों के साथ किया शानदार प्रदर्शन

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कई प्रमुख खेलों की गैरमौजूदगी के बावजूद भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, जिसमें 13 स्वर्ण पदक शामिल थे।

भारतीय खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग, जूडो, पैरा खेल, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स में यादगार प्रदर्शन किया। बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक शामिल रहे।

कई खिलाड़ियों ने रचा इतिहास

ग्लासगो में जूडो खिलाड़ियों अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने पहली बार इन खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह और महाराष्ट्र के अतरौली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल किए।

तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में भारत के लिए पहला कॉमनवेल्थ पदक जीतकर इतिहास बनाया। चोट के बावजूद उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया।

पोडियम पर दिखा भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा

ग्लासगो में कई स्पर्धाओं में एक साथ दो भारतीय खिलाड़ी पोडियम पर नजर आए। जैवलिन में नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह, ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु तिरुमारन सहित कई खिलाड़ियों की जोड़ियों ने भारत की बढ़ती ताकत दिखाई।

इन उपलब्धियों से साफ है कि भारत कई खेलों में एक साथ मजबूत दावेदारी पेश करने की स्थिति में पहुंच रहा है।

अहमदाबाद में तेज हुई तैयारियां

अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयारियों को गति दी जा रही है। गुजरात सरकार ने खेलों की तैयारियों के लिए बजट में 1,278 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव को केंद्र बनाकर मेट्रो विस्तार, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और सड़क सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है। आयोजकों का लक्ष्य है कि खेलों की समाप्ति के बाद भी तैयार किए गए ढांचे का लंबे समय तक फायदा मिलता रहे।

 

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