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आज से शुरू हुआ आषाढ़ मास, बनेंगे कई शुभ संयोग; जानिए धार्मिक महत्व, व्रत-त्योहार और विशेष मान्यताएं

नेशनल डेस्क : हिंदू पंचांग के अनुसार आज यानी 30 जून से आषाढ़ मास का शुभारंभ हो गया है। चैत्र, वैशाख और ज्येष्ठ के बाद आने वाला आषाढ़ वर्ष का चौथा महीना माना जाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह माह बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वह समय होता है जब गर्मी का मौसम विदा लेने लगता है और वर्षा ऋतु का आगमन होता है।

मौसम विज्ञान और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ को गर्मी और बारिश के बीच का संधिकाल माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने लगती है और मौसम में तेजी से बदलाव आता है। बदलते मौसम के कारण संक्रमण, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, क्योंकि शरीर को नए वातावरण के अनुरूप ढलने में समय लगता है।

धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है आषाढ़ मास?

सनातन परंपरा में आषाढ़ मास को साधना, तप, पूजा और उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई आराधना से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसी कारण इसे कामना पूर्ति का माह भी कहा जाता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ मास 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई तक रहेगा। इस महीने का नामकरण आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पूर्वाषाढ़ा या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के संयोग के आधार पर किया गया है।

आषाढ़ मास के पहले दिन दान का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास के प्रथम दिन कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन खड़ाऊं, छाता, नमक और आंवले का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और शुभ फल मिलते हैं।

आषाढ़ में आते हैं कई प्रमुख व्रत और पर्व

आषाढ़ मास धार्मिक आयोजनों और महत्वपूर्ण पर्वों से भी जुड़ा हुआ है। इसी महीने भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसके अलावा सूर्य देव और मां दुर्गा की उपासना भी इस माह में विशेष फलदायी मानी जाती है।

गुप्त नवरात्र और देवशयनी एकादशी का भी विशेष महत्व

आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्र का पर्व भी आता है, जिसे तंत्र साधना और शक्ति उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके बाद अगले चार महीनों तक मांगलिक और शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है।

गुरु पूर्णिमा पर होगा गुरु वंदन का महापर्व

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। देशभर में श्रद्धालु अपने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

 

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