
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक बयान नई राजनीतिक बहस को जन्म दे गया है। कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों के दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की वकालत करते हुए गहलोत ने ऐसा संदेश दिया है, जिसे तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी से जोड़कर देखा जा रहा है।
पहली बार कांग्रेस के बड़े नेता ने सार्वजनिक रूप से कही विलय की बात
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि अब तक ऐसी बातें केवल सूत्रों और अटकलों तक सीमित थीं। लेकिन अब अशोक गहलोत ने खुलकर कहा है कि कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों को वापस कांग्रेस में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। इसे कांग्रेस की ओर से अब तक का सबसे स्पष्ट राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं
हाल ही में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली पहुंची थीं। इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उन्हें कांग्रेस में शामिल होकर पार्टी का उपाध्यक्ष पद संभालने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इन दावों का खंडन किया था।
संजय राउत के सुझाव का गहलोत ने किया समर्थन
अशोक गहलोत ने शिवसेना नेता संजय राउत के उस सुझाव का समर्थन किया, जिसमें कांग्रेस से अलग होकर बने दलों के फिर से एकजुट होने की बात कही गई थी। गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में विपक्षी एकता जरूरी है और कांग्रेस से अलग होकर बने दलों को राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। जो पार्टियां कांग्रेस से अलग होकर बनी हैं, उन्हें वापस कांग्रेस में शामिल होना चाहिए और राहुल गांधी को दिल से नेता स्वीकार करना चाहिए। पूरे देश में यह संदेश जाना चाहिए कि इंडिया गठबंधन का नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे हैं।”
राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी का दिया संदेश
गहलोत ने कहा कि यदि विपक्ष एकजुट होकर स्पष्ट नेतृत्व का संदेश जनता तक पहुंचाए तो इसका असर चुनावी राजनीति पर भी दिखाई देगा। उनके मुताबिक एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और दूसरी तरफ राहुल गांधी। यदि यह मुकाबला स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखा जाए तो मतदान का रुझान बदल सकता है।
कांग्रेस से अलग हुए दलों को सोचने की सलाह
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दल वैचारिक रूप से अलग हैं और उन पर कोई दावा नहीं किया जा सकता, लेकिन कांग्रेस से टूटकर अस्तित्व में आए राजनीतिक दलों को मौजूदा परिस्थितियों में अपने भविष्य पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं और युवाओं को विचारधारा के आधार पर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
टीएमसी में राजनीतिक संकट के बीच बढ़ा बयान का महत्व
तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक संकट और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अशोक गहलोत का यह बयान और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस के इस खुले संदेश पर तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।
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