
कोलकाता डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में विलय की घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है और टीएमसी ने इस कदम को पार्टी नेतृत्व और ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात करार दिया है।
बागी गुट की ओर से यह दावा भी किया गया है कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है और आगे चलकर वे टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावा ठोक सकते हैं। वहीं, उन्होंने खुद को एनडीए का हिस्सा बताते हुए केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही है।
टीएमसी का तीखा पलटवार, ‘धोखा’ बताया गया कदम
टीएमसी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ममता बनर्जी के साथ धोखा और विश्वासघात बताया है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी, उन्होंने पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व में संगठन को मजबूत करने का भरोसा दिया था, लेकिन अब वे अपने वादे से पीछे हट गए हैं।
मदन मित्रा ने आगे कहा कि यह पूरा कदम पार्टी के प्रति अनुशासन और भरोसे का उल्लंघन है और इसे किसी भी हाल में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
दो-तिहाई बहुमत के दावे पर बढ़ा विवाद
जब बागी गुट के दावे को लेकर सवाल उठे, तो टीएमसी नेता ने कहा कि अलग पार्टी बनाने के लिए यह केवल शुरुआत है और अभी कई कानूनी और प्रक्रियात्मक चरण बाकी हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतिम फैसला अदालत और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर होगा।
इस बीच बागी गुट के नेताओं ने दावा किया है कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे वे दलबदल विरोधी कानून के दायरे से बाहर आ सकते हैं और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र निर्णय लेने की स्थिति में हैं।
नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावेदारी की तैयारी
सूत्रों के अनुसार बागी गुट के कुछ नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि वे भविष्य में टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर सकते हैं। इसको लेकर कानूनी लड़ाई की संभावना भी जताई जा रही है।
पूर्व सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि यदि दो-तिहाई बहुमत का समर्थन उनके पक्ष में है तो पार्टी के नाम और प्रतीक पर दावा किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत पर निर्भर करेगा।
एनडीए से जुड़ने का दावा, बढ़ी राजनीतिक हलचल
बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने साफ तौर पर कहा है कि वे एनडीए का हिस्सा बनेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है और राज्य की सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
सियासी तनाव के बीच टीएमसी पर बढ़ा दबाव
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी पहले से ही राजनीतिक और आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के अंदर उठे इस विद्रोह ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज होने की संभावना है।
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