Monday , 5 October 2026

राम मंदिर दान घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा! 150 संदिग्धों के नाम सामने, सीएम योगी को आज सौंपी जा सकती है SIT रिपोर्ट

लखनऊ डेस्क : अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि के कथित गबन मामले की जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। मामले की पड़ताल कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट में कई अहम तथ्य दर्ज किए गए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।

छह दिन तक अयोध्या में डेरा डालकर हुई गहन पड़ताल

सूत्रों के मुताबिक, SIT ने लगातार छह दिनों तक अयोध्या में रहकर मामले की बारीकी से जांच की। इस दौरान मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और दान प्रबंधन व्यवस्था से संबंधित कई लोगों से पूछताछ की गई। जांच पूरी होने के बाद टीम शनिवार को आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ लखनऊ लौट आई। जिन लोगों से पूछताछ की गई है, उन्हें फिलहाल शहर छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर उनसे दोबारा भी पूछताछ की जा सकती है। जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय से भी सवाल-जवाब किए गए।

दान राशि ही नहीं, जमीन खरीद और निर्माण खर्च भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसी ने अपनी पड़ताल को केवल दान और चढ़ावे तक सीमित नहीं रखा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी विस्तार से समीक्षा की गई है। आरोप है कि विभिन्न चरणों में करीब 71 एकड़ जमीन बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदी गई थी। इसी आधार पर जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और लेन-देन की प्रक्रियाओं की जांच की गई। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

150 संदिग्धों की पहचान, 25 लोगों पर कार्रवाई की संभावना

सूत्रों के अनुसार, छह दिनों की जांच के दौरान करीब 150 संदिग्ध व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इनमें से लगभग 25 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। SIT ने सीसीटीवी फुटेज, दान पेटियों की निगरानी व्यवस्था, नकदी गिनती की प्रक्रिया और बैंक खातों में धनराशि जमा कराने से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की है। शनिवार को संदिग्धों के बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई गई। अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

2 करोड़ रुपये की वसूली का दावा, पांच लोगों के बयान बने आधार

जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, दान राशि की गिनती से जुड़े पांच लोगों—लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुण और रामशंकर उर्फ टिन्नू—के बयानों के आधार पर अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि कथित गबन की यह घटना वर्ष 2025 की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ मेले के दौरान हुई थी। SIT इस पहलू की भी जांच कर रही है कि उस अवधि में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कहीं कोई गंभीर अनियमितता तो नहीं हुई थी।

दान संग्रह से लेकर धन उपयोग तक हर प्रक्रिया की जांच

विशेष जांच टीम ने मंदिर में दान संग्रह, नकदी गिनती, लेखांकन प्रणाली और धनराशि के उपयोग तक की संपूर्ण प्रक्रिया का परीक्षण किया है। ट्रस्ट सदस्यों, मंदिर प्रशासकों, बैंक अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा वर्ष 2021 तक के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वित्तीय गड़बड़ियों का कोई सिलसिला पहले से तो नहीं चल रहा था।

रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े सुधारों की सिफारिश

सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन, सदस्यों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने और प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही मंदिर संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रिपोर्ट का हिस्सा हो सकता है। दान राशि की साप्ताहिक ऑडिट व्यवस्था लागू करने और प्रतिदिन प्राप्त होने वाले चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की सलाह भी दी गई है।

सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने और जवाबदेही तय करने पर जोर

प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा और निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत सीसीटीवी फुटेज के डेटा स्टोरेज की अवधि 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने की सिफारिश की गई है। साथ ही ट्रस्ट के संचालन में शीर्ष न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है। अब प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली इस रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे की जांच और संभावित कार्रवाई का रास्ता तय हो सकता है।

 

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