
नेशनल डेस्क: नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form 6 को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि उसने Form 6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड पेश करने को कहा, ताकि यह पता चल सके कि Form 6 में बदलाव का फैसला किसने लिया था।
पहले समझिए Form 6 क्या है
Form 6 नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने का आधिकारिक आवेदन है। 18 साल या उससे अधिक उम्र का पात्र भारतीय नागरिक, जिसने पहले मतदाता के तौर पर पंजीकरण नहीं कराया है, इसी फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाता है। इसमें नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता, पहचान और उम्र से जुड़े दस्तावेजों के साथ भारतीय नागरिकता से संबंधित घोषणा भी देनी होती है।
SIR के दौरान Form 6 में क्या जोड़ा गया
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई। इसमें नए मतदाताओं से माता-पिता या दादा-दादी और नाना-नानी के नाम, पुराने मतदान केंद्र और पिछली मतदाता सूची के क्रमांक जैसी जानकारी मांगी गई।
विवाद इस बात को लेकर हुआ कि ऑनलाइन पोर्टल पर यह जानकारी अनिवार्य दिखाई दे रही थी। आलोचकों के मुताबिक, इससे पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड जुटाना मुश्किल हो सकता था।
दो चुनाव आयुक्तों ने क्यों जताई आपत्ति
मामले में आरोप है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 और कुछ अन्य बदलावों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने आपत्ति जताई थी। दावा किया गया कि कुछ फैसले उनकी सहमति के बिना लिए गए।
यही सवाल अब सुप्रीम कोर्ट के सामने भी है कि Form 6 में बदलाव का फैसला केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से लिया गया या पूरे चुनाव आयोग ने इसे मंजूरी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उसने Form 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत रिकॉर्ड देखकर यह जानना चाहती है कि आखिर Form 6 में बदलाव किसने किया।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर आयोग में किसी मुद्दे पर सर्वसम्मति नहीं बनती है तो निर्णय बहुमत के आधार पर होना चाहिए। अब अदालत चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर इस मामले की प्रक्रिया को देखेगी।
ज्ञानेश कुमार के लिए क्या है इसका मतलब
सबसे अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। यानी वह अपने पद पर बने रहेंगे।
हालांकि, अदालत अब चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया और Form 6 में किए गए बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना चाहती है। अगर रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि किसी महत्वपूर्ण फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उस फैसले की कानूनी वैधता पर सवाल उठ सकता है।
मामले में आगे क्या होगा
अब चुनाव आयोग को अदालत के सामने संबंधित रिकॉर्ड पेश करना है। इसके आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि Form 6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने का फैसला किस स्तर पर लिया गया और क्या इसमें आयोग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 में किए गए बदलाव को अवैध घोषित नहीं किया है।
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