
धर्म डेस्क: सावन मास का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित माना जाता है और सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से इसे श्रद्धापूर्वक करती हैं। इस बार मंगला गौरी व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ के दौरान कुछ गलतियों से बचना बेहद आवश्यक होता है।
काले और नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा के समय काले और नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता। इस दिन लाल, पीला, हरा या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करना अधिक शुभ माना जाता है।
सोलह श्रृंगार अर्पित करना न भूलें
माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के दौरान चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, महावर सहित सोलह श्रृंगार अर्पित करें। मान्यता है कि पूजा के बाद इस सुहाग सामग्री का दान किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को करना चाहिए, इसका स्वयं उपयोग नहीं करना चाहिए।
तामसिक भोजन से रखें दूरी
मंगला गौरी व्रत के दिन घर में शुद्धता और सात्विकता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। व्रत के दौरान केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना उचित माना जाता है।
पूजा और आरती अधूरी न छोड़ें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा हमेशा विधि-विधान के साथ पूरी करनी चाहिए। माता गौरी और भगवान शिव की पूजा के बाद आरती अवश्य करें। बिना आरती के पूजा को अधूरा माना जाता है।
क्रोध और अपमान से बचें
मंगला गौरी व्रत के दिन मन, वचन और व्यवहार की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। इस दिन घर के बड़े-बुजुर्गों, पति या किसी भी व्यक्ति का अनादर नहीं करना चाहिए। क्रोध, विवाद और कटु वचन से दूर रहकर शांत और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना शुभ माना जाता है।
Navyug Samachar