
नेशनल डेस्क: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सरकार जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों को लेकर रणनीति बनाने में जुटा है। इस बार संसद के मानसून सत्र में पांच नए और दो लंबित विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है।
परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
इन पांच नए विधेयकों पर हो सकता है विचार
सरकार 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र के दौरान पांच नए विधेयकों को सदन में पेश कर उन पर चर्चा और पारित कराने की तैयारी में है। इनमें शामिल हैं—
- आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026
दो लंबित विधेयकों पर भी होगी चर्चा
सरकार दो पहले से लंबित विधेयकों पर भी विचार कर सकती है। इनमें विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 शामिल है, जिसे 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 भी चर्चा के लिए सूचीबद्ध हो सकता है। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था।
आयकर संशोधन विधेयक का क्या है उद्देश्य?
आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत के सरकारी ऋण बाजार को मजबूत करना, वैश्विक निवेश आकर्षित करना और बाजार में तरलता बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियों को देखते हुए यह संशोधन आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ सकती है न्यायाधीशों की संख्या
सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस विधेयक के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान किया गया है।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे और सख्त
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य देर से पंजीकरण से जुड़े नियमों को और अधिक सख्त बनाना है।
राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में होगा बदलाव
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से वर्ष 1971 के मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस पर भी संसद में चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने पर रहेगा फोकस
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य बदलते औद्योगिक परिवेश के अनुरूप एमएसएमई कानून में सुधार करना है। इसके तहत कारोबार को आसान बनाने, भुगतान में देरी की समस्या के समाधान के लिए व्यवस्था मजबूत करने और मध्यस्थता से जुड़े फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा राज्यों को सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों के गठन में अधिक लचीलापन देने का भी प्रस्ताव है, ताकि जरूरत के अनुसार अधिक परिषदों का गठन किया जा सके।
Navyug Samachar