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Navratri Kalash: नवरात्रि में क्यों स्थापित किया जाता है कलश? जल, नारियल और जौ का क्या है मां दुर्गा की पूजा से संबंध

धर्म डेस्क: शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना की परंपरा सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है। नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल पर कलश स्थापित किया जाता है और अगले नौ दिनों तक इसकी नियमित पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा में कलश को जल, अन्न, प्रकृति और देवी शक्ति के अलग-अलग प्रतीकों से जोड़ा जाता है।

नवरात्रि का पहला दिन सिर्फ मां दुर्गा की पूजा शुरू करने का अवसर नहीं होता, बल्कि इसी दिन घर में देवी शक्ति के स्वागत की शुरुआत भी मानी जाती है। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना शुरू होती है। यही वजह है कि नवरात्रि की साधना में कलश को विशेष स्थान दिया जाता है।

बहुत से लोग कलश स्थापना की विधि जानते हैं, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों के धार्मिक महत्व के बारे में कम जानकारी होती है। आखिर कलश में जल क्यों भरा जाता है, उसके ऊपर नारियल क्यों रखा जाता है, पत्तियां लगाने की क्या मान्यता है और पास में जौ क्यों बोए जाते हैं? आइए जानते हैं।

नवरात्रि के पहले दिन कलश क्यों स्थापित करते हैं?

धार्मिक परंपरा में कलश को मंगल और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में इसकी स्थापना देवी शक्ति के आह्वान से जोड़कर देखी जाती है। मान्यता है कि कलश स्थापित करने के साथ पूजा स्थल को साधना के लिए तैयार किया जाता है और इसके बाद मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना शुरू होती है।

कलश को सिर्फ एक पात्र नहीं माना जाता, बल्कि इसमें प्रकृति, जल, अन्न और जीवन से जुड़े कई प्रतीकों का समावेश माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि की पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।

कलश में जल भरने की क्या मान्यता है?

कलश में सबसे पहले जल भरा जाता है। जल को जीवन का आधार माना जाता है और धार्मिक परंपरा में इसे शुद्धता तथा जीवन शक्ति से जोड़ा गया है। कई घरों में कलश के जल में गंगाजल भी मिलाया जाता है।

इसके साथ अक्षत, सुपारी और सिक्का आदि रखने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। नवरात्रि में कलश की पूजा करते समय जल को जीवन और प्रकृति के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

कलश के ऊपर नारियल क्यों रखा जाता है?

कलश स्थापना में नारियल को सबसे ऊपर रखा जाता है। धार्मिक परंपरा में नारियल को श्रीफल कहा जाता है और इसे शुभ फल माना जाता है। कलश के ऊपर नारियल रखना देवी के प्रति समर्पण और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।

नारियल का कठोर बाहरी आवरण और अंदर का भाग भी इसे एक विशेष धार्मिक प्रतीक बनाता है। पूजा में इसे अर्पित करने के पीछे यह भाव माना जाता है कि व्यक्ति अपने अहंकार और नकारात्मकता को छोड़कर ईश्वर के सामने स्वयं को समर्पित करे।

कलश पर आम की पत्तियां लगाने का क्या अर्थ है?

कलश के मुख पर आम की पत्तियां लगाने की परंपरा काफी प्रचलित है। हरे पत्तों को जीवन, हरियाली और प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है।

नवरात्रि शक्ति की आराधना का पर्व है और प्रकृति को भी शक्ति के एक रूप के तौर पर माना जाता है। ऐसे में कलश में जल और उसके ऊपर हरी पत्तियों का संयोजन जीवन और प्रकृति के संबंध का प्रतीक माना जाता है।

कलश के पास जौ क्यों बोए जाते हैं?

नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके लिए पूजा स्थल पर मिट्टी रखकर उसमें जौ के बीज बोए जाते हैं। नौ दिनों तक इनके बढ़ने की प्रक्रिया देखी जाती है।

जौ को अन्न और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्रि के दौरान जौ का अंकुरित होना प्रकृति में नई शुरुआत और वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण कई परिवारों में जौ के बढ़ने को विशेष महत्व दिया जाता है।

हालांकि जौ की वृद्धि मिट्टी, नमी, तापमान और देखभाल जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।

कलश का मां दुर्गा की पूजा से क्या संबंध है?

कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है और इस पूरी साधना के दौरान कलश पूजा स्थल पर स्थापित रहता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश को देवी शक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाता है। इसके सामने दीपक जलाकर मंत्र, आरती, दुर्गा सप्तशती या अन्य देवी पाठ किए जाते हैं। इस परंपरा का एक उद्देश्य भक्त के मन को पूजा और साधना के लिए एकाग्र करना भी माना जाता है।

नवरात्रि में कलश स्थापना करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

कलश स्थापित करने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। कलश और पूजा सामग्री भी स्वच्छ होनी चाहिए। कलश में साफ जल भरकर पूजा विधि के अनुसार उसमें पूजन सामग्री रखी जाती है।

अगर कलश के पास जौ बोए जा रहे हैं तो मिट्टी में जरूरत के अनुसार नमी बनाए रखना चाहिए। पूजा के दौरान दीपक ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां आग लगने का खतरा न हो।

पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इसे अपनी परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए। मां दुर्गा की आराधना के साथ कलश जीवन, प्रकृति, अन्न और जल के सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है। इसी भाव के साथ नवरात्रि में कलश स्थापना और पूजा की परंपरा निभाई जाती है।

 

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