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बिहार दारोगा भर्ती का रिजल्ट रद्द होते ही पटना में भड़का गुस्सा, सड़क पर उतरे हजारों अभ्यर्थी, जानें पूरा विवाद

बिहार डेस्क: बिहार पुलिस दारोगा भर्ती की मुख्य लिखित परीक्षा का रिजल्ट रद्द किए जाने के बाद पटना में अभ्यर्थियों का विरोध तेज हो गया है। 1,799 दारोगा पदों की भर्ती प्रक्रिया में मुख्य परीक्षा पास करने वाले करीब 11 हजार अभ्यर्थी आयोग के फैसले से नाराज हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि महीनों की तैयारी के बाद जब वे शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी में जुटे थे, तभी रिजल्ट रद्द कर दिया गया।

अभ्यर्थियों ने सरकार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसला वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शन को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मेहनत के बाद अब दोबारा परीक्षा का डर

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने दारोगा भर्ती की कठिन मुख्य लिखित परीक्षा पास की थी और इसके बाद अगले चरण यानी शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। कई अभ्यर्थियों के मुताबिक, वे लगातार मैदान में अभ्यास कर रहे थे और शारीरिक परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर रहे थे।

रिजल्ट रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों के सामने एक बार फिर अनिश्चितता खड़ी हो गई है। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में सामने आने वाली गड़बड़ियों का नुकसान उन अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी है।

क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी?

पटना में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग है कि बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग मुख्य परीक्षा का रिजल्ट रद्द करने का फैसला तत्काल वापस ले। इसके साथ ही सफल अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करने और पूरी भर्ती प्रक्रिया को तय समय में पूरा करने की मांग की जा रही है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा के किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि कुछ केंद्रों पर हुई कथित गड़बड़ी की सजा पूरी भर्ती में शामिल सभी अभ्यर्थियों को नहीं दी जानी चाहिए।

10 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने किया था आवेदन

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने 1,799 दारोगा पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। इस भर्ती के लिए कुल 10 लाख 36 हजार 702 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

प्रारंभिक परीक्षा 18 और 21 जनवरी को दो पालियों में आयोजित की गई थी। परीक्षा में 7 लाख 26 हजार 231 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। कदाचार, ओएमआर में त्रुटि और अन्य कारणों के चलते 29,272 अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया था।

जांच के बाद 6 लाख 96 हजार 959 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। इसके आधार पर 35,857 अभ्यर्थियों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए किया गया था।

27 मई को हुई थी दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा

दारोगा भर्ती की मुख्य लिखित परीक्षा 27 मई को दो पालियों में आयोजित की गई थी। इसमें 34,302 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद आयोग ने 3 जून को अधिसूचना जारी कर इसे स्वच्छ और कदाचार मुक्त बताया था।

हालांकि, आयोग ने यह भी स्वीकार किया था कि दो जिलों के एक-एक परीक्षा केंद्र पर वीक्षक या स्टाफ की ओर से अनुपयुक्त प्रश्न-पुस्तिका की तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई थीं।

पहले परीक्षा को बताया था कदाचार मुक्त, अब रिजल्ट रद्द

मुख्य परीक्षा के बाद आयोग की ओर से परीक्षा को कदाचार मुक्त बताया गया था। बाद में सामने आई शिकायतों और कदाचार की सूचना के बाद मुख्य परीक्षा का रिजल्ट रद्द करने का फैसला लिया गया। इसी फैसले को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी है।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का सवाल है कि अगर कुछ परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी हुई है तो उन केंद्रों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका कहना है कि किसी सीमित स्तर की गड़बड़ी के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला फैसला क्यों लिया गया।

फिलहाल पटना में अभ्यर्थियों का विरोध जारी है। प्रदर्शनकारियों की नजर अब बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग और सरकार के अगले कदम पर है। अभ्यर्थियों ने कहा है कि रिजल्ट रद्द करने का फैसला वापस होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

 

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