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PCOD, PCOS या PMOS? तीनों को एक समझने की गलती पड़ सकती है भारी, जानें महिलाओं की सेहत से जुड़ा पूरा अंतर

नेशनल डेस्क: महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। इनमें PCOD और PCOS जैसी स्थितियां काफी आम हैं, लेकिन अब PMOS नाम भी चर्चा में है। अक्सर लोग इन तीनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि इनके स्वरूप और प्रभाव में अंतर होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन स्थितियों को समझना जरूरी है ताकि समय रहते सही देखभाल और उपचार किया जा सके।

PCOS को अब PMOS नाम से समझने की कोशिश

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS महिलाओं में प्रजनन आयु के दौरान होने वाली सबसे आम हार्मोनल समस्याओं में से एक है। इसे महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन में परेशानी और बांझपन से जुड़ी प्रमुख वजहों में गिना जाता है।

हाल ही में मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित जानकारी के अनुसार PCOS के लिए Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome यानी PMOS नाम का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि यह समस्या केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है।

PCOD क्या है और शरीर पर कैसे डालता है असर

PCOD यानी Polycystic Ovarian Disease मुख्य रूप से ओवरी से जुड़ी समस्या मानी जाती है। इसमें ओवरी कई अविकसित अंडे बनाती है, जो आगे चलकर छोटे-छोटे सिस्ट का रूप ले सकते हैं।

PCOD से प्रभावित महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होना, वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। तनाव, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं।

इस स्थिति में ओव्यूलेशन पूरी तरह बंद नहीं होता, इसलिए प्रजनन क्षमता पर इसका प्रभाव PCOS की तुलना में कम हो सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

PCOS सिर्फ ओवरी नहीं, पूरे शरीर से जुड़ी समस्या

PCOS यानी Polycystic Ovary Syndrome केवल ओवरी की बीमारी नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम है। इसमें शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है।

इस स्थिति में अपरिपक्व अंडे ओवरी में जमा हो सकते हैं। इसके साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या भी जुड़ी हो सकती है। PCOS के लक्षणों में वजन बढ़ना, मुंहासे, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आना और बाल झड़ना शामिल हो सकते हैं।

लंबे समय तक यह समस्या बनी रहने पर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ओव्यूलेशन में लगातार परेशानी होने से गर्भधारण में भी कठिनाई आ सकती है।

PMOS क्या है और इसका नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी

PMOS यानी Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome को PCOS का नया नाम बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य इस बीमारी की वास्तविक प्रकृति को ज्यादा स्पष्ट करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि PCOS नाम से कई बार यह भ्रम पैदा होता है कि यह केवल ओवरी में सिस्ट बनने की समस्या है, जबकि वास्तव में यह शरीर के कई हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी स्थिति है।

PMOS नाम के हर हिस्से का मतलब

Polyendocrine का मतलब है कि यह स्थिति केवल प्रजनन हार्मोन तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसुलिन, टेस्टोस्टेरोन और कोर्टिसोल जैसे कई हार्मोनों को प्रभावित कर सकती है।

Metabolic यह बताता है कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, सूजन और डायबिटीज व हृदय रोग का खतरा जुड़ा हो सकता है।

Ovarian यह दर्शाता है कि ओवरी इस स्थिति का अहम हिस्सा है, लेकिन Cystic शब्द हटाने की वजह यह है कि हर PCOS प्रभावित महिला की ओवरी में सिस्ट मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है।

Syndrome यह बताता है कि यह एक जटिल स्थिति है, जिसके लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं।

PCOD और PCOS/PMOS के इलाज में क्या अंतर है

PCOD के ज्यादातर मामलों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से सुधार देखा जा सकता है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करने से इसके लक्षण कम किए जा सकते हैं।

वहीं PCOS या PMOS में केवल जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त नहीं हो सकते। इस स्थिति में हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं, हार्मोन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर फर्टिलिटी उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे पीरियड्स में बदलाव, अचानक वजन बढ़ना, अत्यधिक बालों की समस्या या अन्य हार्मोनल संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें।

 

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