Thursday , 1 October 2026

Pitru Paksha Upay: पितृपक्ष में छूट गया श्राद्ध तो न हों परेशान, इन आसान उपायों से करें पितरों का स्मरण

धर्म डेस्क: पितृपक्ष का समय पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस साल पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।

अगर किसी कारणवश आप पितृपक्ष में विधि-विधान के साथ श्राद्ध या तर्पण नहीं कर पा रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मों में श्रद्धा और भावना का विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं।

पशु-पक्षियों को कराएं भोजन

पितृपक्ष के दौरान पशु-पक्षियों को भोजन कराना आसान उपाय माना जाता है। रोजाना गाय को पहली रोटी खिलाई जा सकती है। इसके अलावा कौवे के लिए भोजन निकालें और चींटियों या चिड़ियों के लिए दाना-पानी रखने की परंपरा भी मानी जाती है। मान्यता है कि इससे पितरों का स्मरण और सेवा का भाव व्यक्त होता है।

सर्वपितृ अमावस्या पर करें तर्पण

अगर किसी वजह से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, तो पितृपक्ष के आखिरी दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण या पिंडदान किया जा सकता है। इस दिन सभी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा मानी जाती है।

ब्राह्मण या जरूरतमंद को कराएं भोजन

अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराया जा सकता है। इसके साथ ही अन्न, वस्त्र या क्षमता के अनुसार अन्य जरूरी चीजों का दान भी किया जा सकता है। पितृपक्ष में सेवा और दान को भी पुण्यकारी माना गया है।

काले तिल मिलाकर जल करें अर्पित

अगर आपको श्राद्ध की विस्तृत विधि नहीं आती है, तो भी सरल तरीके से पितरों का तर्पण किया जा सकता है। इसके लिए सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल लें और उसमें काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें।

पितरों से क्षमा मांगकर करें स्मरण

अगर किसी मजबूरी के कारण श्राद्ध नहीं कर पा रहे हैं, तो खुले आकाश के नीचे हाथ जोड़कर अपने पितरों का स्मरण करें और अपनी असमर्थता के लिए उनसे क्षमा प्रार्थना करें। इसके साथ ही इन दिनों श्रीमद्भगवद्गीता या भागवत का पाठ और स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।

 

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