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मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए स्कूल का डरावना एक्सपेरिमेंट! आंखों से खून दिखाकर डराए बच्चे, रोने लगे छात्र

उत्तराखंड डेस्क: बच्चों को मोबाइल फोन और ज्यादा स्क्रीन टाइम से दूर रखने के लिए उत्तराखंड के खटीमा के आदर्श इंडिया मॉन्टेसरी स्कूल में कराई गई एक गतिविधि अब चर्चा में है। इस गतिविधि का मकसद बच्चों को मोबाइल और गेमिंग के ज्यादा इस्तेमाल के नुकसान समझाना था, लेकिन इसका तरीका इतना डरावना था कि कई बच्चे घबरा गए और रोने लगे। मामले के बाद शिक्षा विभाग ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में फोन के बढ़ते इस्तेमाल को नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए डर पैदा करने के बजाय सही और उम्र के मुताबिक तरीके अपनाने चाहिए।

मामला ऊधम सिंह नगर के खटीमा स्थित आदर्श इंडिया मॉन्टेसरी स्कूल का है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल में बच्चों को मोबाइल, गेमिंग और ज्यादा स्क्रीन टाइम के नुकसान बताने के लिए जागरूकता गतिविधि आयोजित की गई थी। इस दौरान एक बच्चे की आंखों पर ऐसी पट्टी लगाई गई, जिस पर लाल रंग लगाया गया था। इससे ऐसा दिखाई दे रहा था जैसे उसकी आंख से खून निकल रहा हो।

बच्चों को बताया गया कि यह बच्चा ज्यादा फोन इस्तेमाल करता था, इसलिए डॉक्टरों ने उसकी आंखें निकाल दीं। यह सुनकर कई बच्चे डर गए और रोने लगे। कुछ बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की बात कहते नजर आए। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

बच्चों में तेजी से बढ़ रहा स्क्रीन टाइम

2025 में इंडियन पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित एक शोध में 3 महीने से 14 साल तक की उम्र के 771 बच्चों के स्क्रीन टाइम का अध्ययन किया गया था। इसमें बच्चों का औसत स्क्रीन टाइम करीब 2.62 घंटे प्रतिदिन पाया गया, जो तय मानकों से काफी अधिक बताया गया।

मोबाइल और अन्य स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर बच्चों के व्यवहार और विकास पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं। इसी संदर्भ में छोटे बच्चों में स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से ऑटिज्म जैसे लक्षणों पर भी चर्चा होती है।

क्या होता है वर्चुअल ऑटिज्म

वर्चुअल ऑटिज्म कोई अलग मेडिकल टर्म नहीं है। आम तौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन इस्तेमाल के साथ दिखाई देने वाले ऑटिज्म जैसे लक्षणों के संदर्भ में इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।

गाजियाबाद के जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग के डॉ. विपिनचंद्र उपाध्याय के मुताबिक, फोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण कुछ बच्चों में बातचीत के दौरान आई-कॉन्टैक्ट नहीं करने और फोन से जुड़ी असामान्य गतिविधियों जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले 4 से 5 साल में यह समस्या ज्यादा बढ़ी है और इससे बचाव जरूरी है।

बच्चों को फोन से दूर रखने के लिए क्या करें

छोटे बच्चों को फोन देने से बचना चाहिए। खास तौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फोन की जरूरत नहीं बताई गई है।

बच्चों से रोजाना बातचीत करना जरूरी है। इससे उनका सामाजिक और भाषाई विकास बेहतर तरीके से हो सकता है।

बच्चों को घर के अंदर फोन देने के बजाय बाहर खेलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

अगर बच्चे में व्यवहार या विकास से जुड़े किसी तरह के लक्षण दिखाई दें तो विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित इलाज और मार्गदर्शन लेना चाहिए।

 

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