नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर अर्थशास्त्री और लेखक परकला प्रभाकर ने बड़ा बयान दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर ने कहा कि SIR सिर्फ चुनाव से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत को ‘सवर्ण हिंदू राष्ट्र’ बनाने की कोशिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसका बुनियादी स्तर पर विरोध होना चाहिए, क्योंकि यह देश को किस दिशा में ले जाएगा, यह महत्वपूर्ण सवाल है।
उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में ज्यादातर मुसलमान, ईसाई, अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और हाशिए पर रहने वाले या जिनकी आवाज नहीं सुनी जाती, ऐसे लोग शामिल थे। प्रभाकर ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा है तो ये समुदाय अब तक मतदाता सूची में कैसे बने हुए थे। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या कोई यह कह सकता है कि यह आखिरी SIR होगा।
चेन्नई में SIR और EVM के खिलाफ कार्यक्रम
चेन्नई के पेरियार थिडल में ‘मूवमेंट फॉर रिट्रीविंग वोटर राइट्स’ की ओर से आयोजित ‘EVM पर रोक लगाओ, SIR को खारिज करो’ कार्यक्रम में प्रभाकर ने अपनी बात रखी। उन्होंने हाल में चुनाव आयोग की ओर से किए गए SIR की तुलना कुछ साल पहले हुए SIR अभ्यास से की और दोनों के बीच अंतर का उल्लेख किया।
प्रभाकर ने कहा कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए अब बहुत कम समय बचा है। उन्होंने राजनीतिक दलों से एकजुट रहने और SIR के खिलाफ मजबूती से लड़ने की अपील की।
चुनाव नहीं लड़ने की भी अपील
परकला प्रभाकर ने राजनीतिक दलों से चुनाव में हिस्सा नहीं लेने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि चुनाव में भाग लेने से केवल धोखाधड़ी को वैधता मिलेगी। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल का भी विरोध किया और कहा कि इससे जुड़े कई सवाल अभी तक अनसुलझे हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर किया दावा
प्रभाकर ने कहा कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का अध्ययन किया है। इसके आधार पर उन्होंने 2024 के जनादेश को ‘चुराया हुआ जनादेश’ बताया। यह प्रभाकर का दावा है, जिसे उन्होंने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में रखा।
Navyug Samachar