Monday , 5 October 2026

Abhijeet Dipke की राजनीति में एंट्री पर सस्पेंस! शिंदे सरकार के मंत्री का बड़ा दावा- ‘परिवार नहीं चाहता बेटा राजनीति में आए’

नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर सियासी चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। उनके राजनीति में आने की अटकलों के बीच महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिंदे गुट के नेता संजय शिरसाट ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दीपके के माता-पिता नहीं चाहते कि उनका बेटा राजनीति में आए। परिवार की इच्छा है कि वह नौकरी करे और सामान्य एवं सुखी जीवन बिताए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन्हें जबरन राजनीति में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

26 जुलाई को परिवार से मुलाकात का किया दावा

संजय शिरसाट ने बताया कि 26 जुलाई को उन्होंने अभिजीत दीपके के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि वह अभिजीत को बचपन से जानते हैं और दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से बेहद करीबी संबंध हैं। उनके अनुसार, उनका बेटा हर साल अभिजीत दीपके की बहन से राखी बंधवाता है। उन्होंने यह भी कहा कि दीपके परिवार उनके मतदाता हैं और दोनों परिवारों के बीच वर्षों पुराने पारिवारिक संबंध रहे हैं।

शिरसाट ने कहा कि रिश्तेदार जैसे संबंध होने के कारण परिवार का हालचाल जानना उनका दायित्व था। उन्होंने बताया कि वह कई बार दीपके परिवार के घर जा चुके हैं और उनका परिवार भी उनके विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होता रहा है।

‘परिवार चाहता है राजनीति से दूर रहें अभिजीत’

मंत्री ने कहा कि अभिजीत दीपके के माता-पिता की स्पष्ट इच्छा है कि उनका बेटा राजनीति से दूर रहे और नौकरी करके सामान्य जीवन जिए। उन्होंने दावा किया कि परिवार नहीं चाहता कि अभिजीत किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनें। इसके बावजूद कुछ लोग उन्हें राजनीति में सक्रिय करने के लिए लगातार माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

संजय शिरसाट ने यह भी कहा कि अभिजीत दीपके ने उनसे बातचीत में बताया था कि उन्हें सभी लोगों के फोन आए, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस था कि शिरसाट का फोन नहीं आया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अभिजीत भावुक भी हो गए थे।

आंदोलन को लेकर भी रखी अपनी प्रतिक्रिया

आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय शिरसाट ने कहा कि एक तरफ आंदोलन चल रहा था तो दूसरी तरफ पेड़े बांटे जा रहे थे। उनके मुताबिक, इस तरह के दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बने।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मिट्टी में नेतृत्व देने की ताकत है। मराठवाड़ा ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को नेतृत्व दिया है। इसी क्रम में उन्होंने शरद पवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी देश के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संजय राउत पर साधा निशाना

संजय शिरसाट ने शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत केवल अपने दल को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे के स्वस्थ और दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि उनकी सभी परेशानियां दूर हों।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश में कुछ हुआ और महाराष्ट्र में पेड़े बांटे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ठाणे, पुणे और मातोश्री के चक्कर लगाने का इस पूरे घटनाक्रम से क्या संबंध है। उनका आरोप था कि कुछ नेताओं ने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए।

युवाओं और आंदोलन को लेकर भी दिया बयान

संजय शिरसाट ने कहा कि इस आंदोलन में देश का युवा अपने दम पर खड़ा था और उसने किसी भी नेता का सहारा नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इस आंदोलन के जरिए अपनी ही राजनीतिक ताकत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दीपके ने स्वयं उनसे कहा था कि विपक्ष लगभग समाप्त हो चुका है।

फडणवीस और संजय राउत के बयान पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिरसाट ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में देवेंद्र फडणवीस को शिक्षा मंत्री बनाने जैसी बात की जानकारी आखिर संजय राउत तक कैसे पहुंची। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि वास्तव में ‘मन की बात’ तो संजय राउत ही कर रहे हैं और लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं।

लाठीचार्ज और छात्रों को लेकर कही अहम बात

मंत्री ने कहा कि केवल नीट परीक्षा ही नहीं, बल्कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में कम अंक आने के बाद भी कई छात्र घर छोड़ देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि किसी भी परिस्थिति में कोई गलत कदम न उठाएं।

प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इसका आदेश किसने दिया था। हालांकि, यदि बिना आदेश के लाठीचार्ज हुआ होगा तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

शरद पवार और महाविकास आघाड़ी पर भी की टिप्पणी

संजय शिरसाट ने कहा कि शरद पवार को अपना रुख बदलने की आदत है और यदि वह भविष्य में कोई नया फैसला लेते हैं तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि शरद पवार कोई निर्णय लेते हैं तो संभव है कि वह महाराष्ट्र के हित को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला हो।

महाविकास आघाड़ी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह गठबंधन अस्तित्व में नहीं रहा है। वहीं सरकारी व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि यह दावा नहीं किया जा सकता कि कोई भी सरकारी अधिकारी पैसे नहीं मांगता। उनके अनुसार, अच्छा काम करना हर अधिकारी की जिम्मेदारी और अधिकार है, लेकिन यदि कोई दलाली करना चाहता है तो उसे नौकरी छोड़कर वही काम करना चाहिए।

 

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