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जिस दिशा में घूमी रोटी, उसी ओर से बरसेंगे बादल! 500 साल पुरानी परंपरा से गांव वाले लगाते हैं बारिश का अनुमान

अजब-गजब डेस्क: गुजरात के जामनगर जिले के आमरा गांव में मानसून को लेकर एक अनोखी परंपरा आज भी निभाई जा रही है। करीब 500 साल पुरानी इस परंपरा में ग्रामीण एक खास रोटी के जरिए बारिश का अनुमान लगाने का दावा करते हैं। गांव के लोगों का मानना है कि पूजा के बाद कुएं में डाली गई रोटी जिस दिशा में आगे बढ़ती है, उसी दिशा से बारिश आने का संकेत मिलता है।

500 साल पुरानी परंपरा पर आज भी भरोसा

आमरा गांव में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, हर साल मानसून से पहले इस विशेष आयोजन को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ किया जाता है। उनका विश्वास है कि इस परंपरा से बारिश के समय, दिशा और मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है।

महिलाएं तैयार करती हैं खास रोटी

इस अनोखी परंपरा के तहत गांव की महिलाएं विशेष तरीके से एक बड़ी रोटी तैयार करती हैं। रोटी बनने के बाद पूरे गांव में उत्साह का माहौल बन जाता है। ग्रामीण इसे केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और वर्षों पुरानी विरासत का हिस्सा मानते हैं।

ढोल-नगाड़ों के साथ निकलता है जुलूस

रोटी तैयार होने के बाद गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला जाता है। यह जुलूस गांव के कुएं के पास स्थित सती माताजी मंदिर तक पहुंचता है। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और ध्वजारोहण का आयोजन भी होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होते हैं।

कुएं में रोटी डालकर देखते हैं दिशा

पूजा पूरी होने के बाद परंपरा के अनुसार एक निर्धारित व्यक्ति उस विशेष रोटी को कुएं में प्रवाहित करता है। इसके बाद ग्रामीण उत्सुकता से देखते हैं कि पानी में जाने के बाद रोटी किस दिशा में बढ़ती है।

ग्रामीणों का मानना है कि रोटी की दिशा से यह संकेत मिलता है कि इस साल बारिश किस ओर से आएगी, कब होगी और उसका प्रभाव कितना रहेगा।

पूर्वजों से चली आ रही मान्यता

ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। वर्षों से इसे गांव में आस्था और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है। लोगों का मानना है कि यह आयोजन गांव को एकजुट करने और अपनी पुरानी संस्कृति को बनाए रखने का माध्यम भी है।

इस साल अच्छी बारिश की उम्मीद

इस वर्ष भी रोटी के संकेतों के आधार पर ग्रामीणों ने अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई है। गांव के लोगों के लिए यह परंपरा सिर्फ मौसम का अनुमान लगाने का तरीका नहीं, बल्कि उनकी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।

 

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