
बिजनेस डेस्क: दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बदल रहा है। इलेक्ट्रिक कारों के साथ स्कूटर, मोटरसाइकिल और थ्री-व्हीलर की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन किस देश में हैं और इस वैश्विक दौड़ में भारत किस पायदान पर खड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों और वैश्विक तुलना में चीन सबसे आगे दिखाई देता है, जबकि भारत का बाजार खासतौर पर दोपहिया और थ्री-व्हीलर वाहनों के दम पर तेजी से विस्तार कर रहा है।
चीन ने EV बाजार में बनाई सबसे बड़ी बढ़त
इलेक्ट्रिक वाहनों के वैश्विक बाजार में चीन का दबदबा सबसे ज्यादा है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन बाजार होने के साथ-साथ इनके निर्माण में भी मजबूत स्थिति रखता है। वहां घरेलू कंपनियों ने बैटरी, इलेक्ट्रिक कार और दूसरे इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश किया है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में दुनिया में बिकने वाली इलेक्ट्रिक कारों में चीन की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत रही। चीन में एक साल में एक करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई। इसके अलावा बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक दोपहिया और थ्री-व्हीलर भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
चीन की BYD, Geely और SAIC जैसी कंपनियां वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी बना चुकी हैं। BYD वैश्विक प्लग-इन वाहन बिक्री के मामले में Tesla जैसी कंपनियों को भी कड़ी चुनौती दे रही है।
अमेरिका और यूरोप की स्थिति भी मजबूत
चीन के बाद अमेरिका दुनिया के बड़े इलेक्ट्रिक कार बाजारों में शामिल है। यहां Tesla के अलावा कई दूसरी कंपनियां भी इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में मौजूद हैं। हालांकि, अमेरिका में EV बिक्री की रफ्तार चीन से अलग रही है और यहां बाजार का आकार सरकारी नीतियों तथा उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार बदलता रहा है।
यूरोप में नॉर्वे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का सबसे अलग उदाहरण है। वहां इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री का हिस्सा दुनिया के ज्यादातर देशों की तुलना में काफी अधिक है। टैक्स में छूट, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुविधाएं और पेट्रोल-डीजल वाहनों की अपेक्षाकृत ज्यादा लागत ने नॉर्वे में EV को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारत किस पायदान पर खड़ा है?
भारत तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में जरूर शामिल है, लेकिन कुल इलेक्ट्रिक कारों की संख्या और बाजार हिस्सेदारी के मामले में अभी चीन और कुछ प्रमुख देशों से पीछे है। हालांकि भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की तस्वीर केवल कारों से नहीं बनती।
देश में इलेक्ट्रिक स्कूटर, मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और दूसरे थ्री-व्हीलर बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उपलब्ध वैश्विक तुलनाओं में भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापक बाजार के लिहाज से शीर्ष 10 देशों के आसपास रखा जाता है।
दोपहिया और थ्री-व्हीलर ने बदली भारत की तस्वीर
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार में दोपहिया और थ्री-व्हीलर की भूमिका सबसे अहम रही है। शहरों में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की संख्या बढ़ी है, वहीं ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो ने छोटे शहरों और कस्बों में भी अपनी जगह मजबूत की है।
कारों की तुलना में इन वाहनों की कीमत अपेक्षाकृत कम होती है। साथ ही रोजाना कम दूरी तय करने वाले लोगों के लिए इनका इस्तेमाल सुविधाजनक है और ईंधन खर्च भी बचता है। यही वजह है कि भारत का EV बाजार सिर्फ कार बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोपहिया और थ्री-व्हीलर कंपनियां भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
उत्तर प्रदेश भी बना बड़ा EV बाजार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की तस्वीर हर राज्य में एक जैसी नहीं है। उत्तर प्रदेश प्रमुख EV बाजारों में शामिल है। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण की संख्या तेजी से बढ़ी है। बड़ी आबादी के कारण यहां इलेक्ट्रिक दोपहिया और थ्री-व्हीलर की मांग भी मजबूत बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु भी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आगे हैं। इन राज्यों में बड़े शहरों के साथ ऑटोमोबाइल निर्माण का मजबूत आधार और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार ने EV बाजार को बढ़ावा दिया है।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा EV बाजार को सहारा
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाएं चला रही हैं। पीएम ई-ड्राइव योजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
भारत ने 2030 तक नए वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी रखा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में दोपहिया, थ्री-व्हीलर और इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग भारत के EV बाजार को वैश्विक दौड़ में और मजबूत कर सकती है।
Navyug Samachar