Monday , 28 September 2026

प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत पर बढ़ी गुत्थी! कटे गुप्तांग से खून सने ग्राइंडर तक कई सवाल

मथुरा डेस्क: संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षित 25 वर्षीय साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला जांच आगे बढ़ने के साथ और उलझता जा रहा है। शुक्रवार 25 सितंबर की सुबह वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज की चार मंजिला इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल दीपक को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस को मिले CCTV फुटेज में वह कथित तौर पर चौथी मंजिल की छत पर जाते, कुछ देर वहां बैठते और फिर नीचे कूदते दिखाई दे रहे हैं। इससे शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका सामने आई, लेकिन कमरे से कटा हुआ गुप्तांग और खून से सना ग्राइंडर मिलने समेत कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अभी जांच में तलाशा जा रहा है।

25 सितंबर की सुबह क्या हुआ था?

मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी दीपक लोधी ने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद रसिक दुलारी शरण नाम से रहना शुरू किया था। वह केली कुंज से जुड़े गुरु कृपा कुंज परिसर में रहते थे, जहां अन्य दीक्षित साधक भी रहते हैं।

शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे दीपक चार मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल से नीचे गिरे। शुरुआती जानकारी में इसे इमारत से गिरने की घटना बताया गया था, लेकिन बाद में पुलिस को मिले CCTV फुटेज में उनके खुद छत पर जाने और फिर नीचे कूदने की बात सामने आई। घटनास्थल संबंधी जानकारी के मुताबिक वह भवन से करीब छह फुट दूर सड़क पर गिरे थे। दूसरे साधक उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने गुरु कृपा कुंज पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।

गुप्तांग कटने से जांच में आया नया मोड़

मामले में सबसे बड़ा सवाल दीपक के गुप्तांग के कटे होने को लेकर है। उनके कमरे से उनका कटा हुआ गुप्तांग और खून लगा ग्राइंडर मिलने की बात सामने आई है। पुलिस ने ग्राइंडर से फिंगरप्रिंट लिए हैं और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिया है।

अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि दीपक को यह चोट कब लगी और क्या इसका संबंध कमरे से मिले ग्राइंडर से है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ग्राइंडर का इस्तेमाल किसने किया था। अभी किसी आधिकारिक जांच निष्कर्ष से यह साबित नहीं हुआ है कि ग्राइंडर दीपक ने ही चलाया था। ऐसे में उनके द्वारा खुद को यह चोट पहुंचाने की बात फिलहाल जांच का विषय है।

CCTV में छत से कूदते दिखे दीपक, लेकिन कमरे में क्या हुआ?

पुलिस के पास मौजूद CCTV फुटेज को मामले का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। करीब तीन मिनट के फुटेज में दीपक चौथी मंजिल की छत पर जाते दिखाई देते हैं। इसके बाद वह बाउंड्री वॉल पर बैठते हैं, फिर लेटते हैं और कुछ समय बाद नीचे कूदते नजर आते हैं। पुलिस ने CCTV का डीवीआर भी कब्जे में लिया है।

हालांकि, यह फुटेज सिर्फ इमारत से नीचे जाने की घटना दिखाता है। इससे यह पता नहीं चलता कि छत पर पहुंचने से पहले कमरे में क्या हुआ था। यदि गुप्तांग पर लगी चोट पहले ही लग चुकी थी तो वह कब लगी, उस समय कमरे में कौन मौजूद था और इतनी गंभीर चोट के बाद दीपक किस स्थिति में छत तक पहुंचे, इन सवालों की जांच की जा रही है।

ग्राइंडर पर किसके फिंगरप्रिंट, फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

कमरे से बरामद खून लगा ग्राइंडर जांच का अहम भौतिक साक्ष्य है। पुलिस ने उसके फिंगरप्रिंट लिए हैं और फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। अब यह सामने आना बाकी है कि ग्राइंडर पर किसके निशान मिलते हैं और उस पर मिला खून किसका है।

दीपक को बिजली का काम आता था और आश्रम में वह बिजली संबंधी काम भी देखते थे। ऐसे में ग्राइंडर का वहां होना अपने आप में किसी अपराध को साबित नहीं करता। जांच एजेंसियों को यह स्थापित करना होगा कि उसका इस्तेमाल कब, किसने और किस उद्देश्य से किया था। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस कड़ी को स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है।

कमरे से छत तक की कड़ी भी अहम

जांच में कमरे और छत के बीच की पूरी समयरेखा भी महत्वपूर्ण है। कमरे में कितना खून था, वहां से छत तक कोई निशान मिले या नहीं, चोट लगने और छत से गिरने के बीच कितना समय बीता और उस दौरान दीपक से किसी की मुलाकात हुई या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

यदि दीपक ने पहले खुद को गंभीर चोट पहुंचाई थी और इसके बाद छत से छलांग लगाई, तो दोनों घटनाओं के बीच की पूरी कड़ी सामने आनी होगी। वहीं, यदि चोट किसी अन्य परिस्थिति में लगी थी तो जांच का दायरा अलग दिशा में जा सकता है।

पुलिस को आश्रम से नहीं, अस्पताल से मिली सूचना

घटना के बाद पुलिस तक सूचना पहुंचने का तरीका भी जांच में सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जानकारी उन्हें सर्वोदय अस्पताल से मिली, जहां घायल दीपक को ले जाया गया था।

ऐसे में जांच के दौरान यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि घटना किस समय हुई, दीपक को अस्पताल कब ले जाया गया, पुलिस को किस समय सूचना मिली और इस दौरान घटनास्थल पर कौन-कौन मौजूद था। सूचना मिलने में लगे समय और घटनास्थल की स्थिति के बीच भी पुलिस कड़ियां जोड़ रही है।

आखिरी फोन किसे किया था? मोबाइल से खुल सकते हैं राज

पुलिस ने दीपक का मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया है। उनकी कॉल डिटेल और आखिरी बातचीत की जांच की जा रही है। घटना से ठीक पहले उन्होंने किससे बात की थी, आखिरी कॉल किसे की थी और उस समय उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे, यह जांच का अहम हिस्सा है।

मोबाइल में मौजूद संदेश, आखिरी संपर्क और अन्य डिजिटल गतिविधियों से घटना से पहले की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। कमरे से मिली डायरी को भी पुलिस ने कब्जे में लिया है, लेकिन उसकी सामग्री अभी सार्वजनिक रूप से प्रमाणित रूप में सामने नहीं आई है।

परिवार का आरोप, मिलने नहीं दिया जाता था

जबलपुर से वृंदावन पहुंचे दीपक के परिजनों ने आश्रम की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। दीपक की मां का कहना है कि दीक्षा लेने के बाद लंबे समय तक उन्हें बेटे से मिलने नहीं दिया जाता था। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी मुलाकात को लेकर इसी तरह की शिकायतें की हैं।

दीपक के जीजा सोनू ने भी मीडिया से ऐसी ही बातें कही हैं। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और पुलिस को प्रार्थना पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पोस्टमार्टम में क्या सामने आया?

दीपक के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चिकित्सकों के पैनल से वीडियोग्राफी के साथ कराए जाने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती पोस्टमार्टम जानकारी में गुप्तांग कटा पाया गया। ऊंचाई से गिरने के बाद हुए गंभीर आघात और अत्यधिक रक्तस्राव को मृत्यु का प्रमुख कारण बताया गया है। शरीर पर अन्य चोटें भी थीं और एक पैर टूटा हुआ मिला।

पोस्टमार्टम से मृत्यु के चिकित्सकीय कारणों की जानकारी मिलती है, लेकिन गुप्तांग पर चोट किस परिस्थिति में लगी और उसका ग्राइंडर से क्या संबंध है, जैसे सवालों के जवाब विस्तृत चिकित्सकीय और फॉरेंसिक जांच से सामने आने बाकी हैं।

नाम और उम्र को लेकर भी अलग-अलग जानकारियां

मामले की शुरुआती रिपोर्टों में मृतक की उम्र और नाम को लेकर भी अंतर सामने आया है। अधिकांश रिपोर्टों में उनकी पहचान दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण और उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई है। कुछ शुरुआती खबरों में उम्र 26 या 30 वर्ष तक बताई गई, जबकि एक रिपोर्ट में नाम ‘दिनेश’ भी सामने आया।

इसी तरह दीक्षा लेने के वर्ष को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में दो वर्ष पहले दीक्षा लेने की बात कही गई है, जबकि बाद की विस्तृत रिपोर्टों में सितंबर 2025 में दीक्षा लेने का उल्लेख है। ऐसे में शुरुआती रिपोर्टों में सामने आई हर जानकारी को अंतिम तथ्य मानने से पहले जांच के आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार जरूरी है।

दीपक लोधी कौन थे?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दीपक जबलपुर के रहने वाले थे और धार्मिक जीवन की ओर उनका झुकाव था। रिपोर्टों में उनके नर्मदा परिक्रमा करने का भी उल्लेख मिलता है। वृंदावन आने के बाद वह प्रेमानंद महाराज से जुड़े और दीक्षा लेने के बाद उन्हें रसिक दुलारी शरण नाम मिला।

दीपक को बिजली का काम आता था और वह आश्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं में बिजली संबंधी कार्य भी देखते थे। एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 से वह गुरु कृपा कुंज में रह रहे थे। अब जांच में वहां रहने वाले अन्य साधकों के बयान भी अहम माने जा रहे हैं कि घटना से पहले दीपक की स्थिति कैसी थी, उन्हें आखिरी बार किसने देखा और कमरे में किसी असामान्य गतिविधि की जानकारी किसी को थी या नहीं।

आत्महत्या की आशंका, लेकिन दूसरे पहलुओं की भी जांच

CCTV में दीपक के छत से नीचे जाने की घटना सामने आने के बावजूद पुलिस गुप्तांग पर लगी चोट, कमरे से मिले खून सने ग्राइंडर, फिंगरप्रिंट, मोबाइल रिकॉर्ड और घटना से पहले की गतिविधियों समेत अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर हत्या साबित नहीं हुई है और CCTV के आधार पर पूरे घटनाक्रम को केवल आत्महत्या मानकर जांच खत्म भी नहीं की गई है।

अब विस्तृत पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट, ग्राइंडर की जांच, पूरे परिसर की CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और वहां मौजूद लोगों के बयानों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दीपक के साथ घटना से पहले क्या हुआ था और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।

 

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