Monday , 5 October 2026

मुलायम से योगी तक… 32 साल में 5 बार बदला भदोही का नाम, अब ‘संत रविदास नगर’ की वापसी; जानिए जिले की पूरी सियासी कहानी

यूपी डेस्क: कालीन नगरी भदोही की प्रशासनिक पहचान एक बार फिर बदल गई है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ऐलान किया कि अब भदोही जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा. खास बात यह है कि बीते करीब 32 साल में जिले का नाम पांचवीं बार बदला है. इस तरह भदोही का नाम बदलने का सिलसिला केवल प्रशासनिक पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की बदलती सियासत से भी जुड़ा रहा है.

काशी से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर बसे भदोही को पहली बार 1994 में नया जिला बनाया गया था. उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे. करीब तीन साल तक यह जिला भदोही के नाम से जाना गया, लेकिन 1997 में मायावती सरकार के दौरान इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया गया.

1999 में फिर बदला नाम

1999 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता ने दोनों नामों को जोड़ दिया. इसके बाद जिले की पहचान ‘संत रविदास नगर-भदोही’ के तौर पर की गई. यानी एक बार फिर भदोही के नाम में बदलाव हुआ और प्रशासनिक पहचान में दोनों नाम शामिल हो गए.

इसके बाद भी नाम बदलने की यह सियासत थमी नहीं. 2014 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संत रविदास नगर नाम को हटाकर जिले का नाम फिर से भदोही कर दिया. इसके बाद एक दशक से ज्यादा समय तक जिला भदोही के नाम से ही जाना जाता रहा.

अब 2026 में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर जिले के नाम में बदलाव की घोषणा हुई है और ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम सामने आया है.

कालीन से लेकर संत रविदास तक बनी पहचान

भदोही की पहचान दुनिया भर में कालीन नगरी के तौर पर है. यहां का हस्तनिर्मित कालीन उद्योग सदियों पुराना है और यह जिला भारत के बड़े कालीन निर्माण केंद्रों में शामिल है. भदोही के कालीन देश-विदेश में निर्यात किए जाते हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण कारीगर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं.

एक तरफ भदोही की पहचान कालीन उद्योग से बनी है, तो अब जिले के नाम में संत रविदास की विरासत को भी प्रमुखता दी गई है. मुख्यमंत्री ने नाम की घोषणा के दौरान संत रविदास के सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का उल्लेख किया.

तीन विधानसभा सीटें, अलग-अलग राजनीतिक समीकरण

भदोही जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं- भदोही, ज्ञानपुर और औराई. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन तीनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिले थे. भदोही सीट से समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग ने जीत दर्ज की थी. ज्ञानपुर से बीजेपी की सहयोगी निषाद पार्टी के विपुल दुबे विजयी हुए थे, जबकि औराई सुरक्षित सीट से बीजेपी के दीनानाथ भास्कर ने जीत हासिल की थी.

इस तरह 2022 में जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर किसी एक पार्टी का कब्जा नहीं रहा. भदोही की राजनीति में ब्राह्मण, बिंद, यादव, दलित, मुस्लिम, क्षत्रिय, पाल और मौर्य जैसे सामाजिक समूहों की महत्वपूर्ण मौजूदगी बताई जाती है. कई सीटों पर दलित और मुस्लिम मतदाता भी अहम भूमिका में रहे हैं.

भदोही में किसी एक दल का स्थायी दबदबा नहीं

भदोही की विधानसभा राजनीति को किसी एक पार्टी का स्थायी गढ़ कहना आसान नहीं है. अलग-अलग चुनावों में यहां बीजेपी, समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी का प्रभाव देखने को मिला है.

भदोही विधानसभा सीट पर 2017 में बीजेपी के रवींद्रनाथ त्रिपाठी ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2022 में समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग ने उन्हें हरा दिया. वहीं ज्ञानपुर सीट पर लंबे समय तक विजय मिश्र का प्रभाव रहा, लेकिन 2022 में निषाद पार्टी के विपुल दुबे ने उन्हें हरा दिया. औराई सीट पर बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत रहा है.

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिले के नाम में संत रविदास की वापसी ने राजनीतिक चर्चा को फिर तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री की यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां तेज हो रही हैं. नाम बदलने के फैसले को लेकर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के अलग-अलग नजरिए हो सकते हैं, लेकिन भदोही की करीब तीन दशक लंबी कहानी यह दिखाती है कि यहां प्रशासनिक नाम के साथ सियासत भी लगातार बदलती रही है.

 

Check Also

UP राज्यसभा चुनाव: BJP आज खोलेगी पत्ते या 10वीं सीट पर होगा बड़ा मुकाबला? सपा के तीसरे उम्मीदवार पर भी सस्पेंस

यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद …