
यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने INDIA गठबंधन और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव में जीत मिलने पर संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन हार या असहज स्थिति सामने आने पर उन्हीं संस्थाओं को निशाने पर लेने लगता है। पाठक ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में INDIA गठबंधन की दाल नहीं गलने वाली।
‘संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना पुराना एजेंडा’, बृजेश पाठक का आरोप
बृजेश पाठक ने विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना विपक्षी दलों का पुराना एजेंडा रहा है। उन्होंने तमिलनाडु, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में विपक्षी दलों की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव जीतने पर इन संस्थाओं को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई जाती।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, “संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़ा करना इनका पुराना एजेंडा है। जब चुनाव जीते हैं, तब कोई बात नहीं। तमिलनाडु में जीते, कर्नाटक में जीते, हिमाचल प्रदेश में जीते। जब जीते हैं, तो फेस सेविंग। उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन का दाल नहीं गलने वाली।”
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष पर क्यों भड़के डिप्टी सीएम?
बृजेश पाठक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनाव में जीत मिलने पर निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए जाते, जबकि हारने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जाने लगते हैं।
बीजेपी का तर्क है कि संवैधानिक संस्थाओं को लेकर विपक्षी दलों का रुख एक जैसा होना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े किसी भी आरोप का आकलन संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
2027 के चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन रहेगा साथ, अखिलेश यादव कर चुके हैं साफ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक मुकाबले की तैयारियां चर्चा में हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन जारी रहेगा।
ऐसे में बृजेश पाठक का बयान विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर बीजेपी के राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच तालमेल आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।
लोकसभा चुनाव 2024 में सपा-कांग्रेस ने किया था बेहतर प्रदर्शन
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस के खाते में छह सीटें आई थीं। दोनों दलों के इस प्रदर्शन के बाद प्रदेश की राजनीति में विपक्षी गठबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
हालांकि, लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वर्ष 2027 में मतदाताओं का रुख किस दल या गठबंधन के पक्ष में रहेगा, यह चुनाव के दौरान सामने आएगा।
INDIA गठबंधन को चुनौती देकर बीजेपी ने तेज किए सियासी हमले
बृजेश पाठक ने अपने बयान के जरिए INDIA गठबंधन पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को चुनौती देते हुए दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में उसकी दाल नहीं गलने वाली। चुनाव से पहले इस तरह के बयानों से प्रदेश में बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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